शोध के प्रश्न, उद्देश्य, दायरे और संदर्भों पर निर्भर करती पद्धति
दरभंगा में सीएम साइंस कॉलेज में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। जंतु वैज्ञानिक डॉ. राम कुमार मिश्र ने शोध की प्रक्रिया और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। डॉ. पारुल बनर्जी और अन्य विशेषज्ञों ने शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के तरीकों पर जोर दिया। कार्यक्रम में शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।

दरभंगा। शोध पद्धति, शोध की रूपरेखा तैयार करने, उसका संचालन करने, उसका विश्लेषण करने और उसकी रिपोर्टिंग करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। इसमें विभिन्न आंकड़ों का संग्रहण करने और उसकी व्याख्या करने के लिए उपयुक्त विधियों और तकनीकों के चयन और उसके अनुप्रयोग के साथ ही शोध निष्कर्षों की वैधता, विश्वसनीयता और नैतिक निहितार्थों का मूल्यांकन शामिल है। सीएम साइंस कॉलेज में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में जंतु वैज्ञानिक सह कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राम कुमार मिश्र ने उक्त बातें कही। कॉलेज में पीजी जंतु विज्ञान विभाग के तत्वावधान में रिसर्च मैथेडोलाजी : टूल्स एंड टेक्नीक विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्रो. मिश्रा ने बताया कि शोध पद्धति सभी के लिए एक समान नहीं होती।
यह शोध के प्रश्न, उद्देश्य, दायरे और संदर्भों पर विशेष रूप से निर्भर करती है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आरती कुमारी ने विभिन्न प्रकार के शोध के लिए अलग-अलग प्रकार की पद्धतियों की आवश्यकता पर बल देते हुए मात्रात्मक, गुणात्मक, मिश्रित और क्रियात्मक शोध पर विस्तार से चर्चा करते हुए शोध के संचालन और मूल्यांकन की विधि पर प्रकाश डाला। डॉ. पारूल बनर्जी ने शोधकर्ताओं को उनके शोध की योजना बनाने, उसे व्यवस्थित और सुसंगत तरीके से संचालित करने की बारीकियों से अवगत कराते हुए शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के महत्वपूर्ण तरीके बताये। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि शोध पद्धति अकादमिक शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू है। शोधकर्ताओं के लिए अपनी शोध परियोजनाओं के लिए उपयुक्त शोध पद्धति को समझना और लागू करना, साथ ही दूसरों की शोध पद्धति का मूल्यांकन और समालोचना करने की सूझबूझ विकसित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोधकर्ताओं को त्रुटियों, पूर्वाग्रहों और नैतिक मुद्दों से बचने की सलाह देते हुए शोध निष्कर्षों को पारदर्शी और सटीक तरीके से प्रस्तुत करने और संप्रेषित करने पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। विभागीय शिक्षिका डॉ. विनीता सिंह एवं डॉ. हर्षा कश्यप के संयुक्त संचालन में आयोजित उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की संयोजिका सह विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा अग्रहरि ने विषय प्रवेश के क्रम में बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य इसके विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुसंधान की मूलभूत अवधारणा, तकनीक तथा इसकी व्यवहारिक पद्धतियों से अवगत कराना है। तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञों ने अनुसंधान पद्धति के महत्व को विस्तार से रेखांकित करते हुए इसकी गुणवत्ता बढाने के हुनर सीखाए। डॉ. पारुल बनर्जी ने जेनेटिक्स के शोध के लिए उपयोगी सूत्र बताए। जेएन कॉलेज, नेहरा के डॉ. बीबी मिश्रा ने डेटा संग्रह तकनीक, विश्लेषण और वैज्ञानिक शोधपत्र लेखन पर अपना उपयोगी व्याख्यान दिया। टीपीएस कॉलेज, पटना के डॉ. विनय कुमार भूषण ने जैविक उत्पत्ति की दवाएं, औषधीय रोगाणुरोधी गुणों के परीक्षण और उसकी कार्यप्रणाली की उपयोगिता को विस्तार से बताया। आयोजन सचिव की जिम्मेदारी मो. तालिब खान तथा डॉ. सुमित कुमार कोले ने निभाई। धन्यवाद ज्ञापन वरुण कुमार प्रभात ने किया। कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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