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जांच समिति ने स्कूल ग के साथ हुए अनुबंध को रद्द करने की अनुशंसा की

जांच समिति ने स्कूल ग के साथ हुए अनुबंध को रद्द करने की अनुशंसा की

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और स्कूल गुरू के बीच हुए अनुबंध को जांच कमेटी ने अवैध, नियम-परिनियम के विरूद्ध एवं गैरकानूनी करार देते हुए इसे रद्द करने की अनुशंसा की है। अनुबंध के लिए दोषी एवं जबावदेह मुख्य अधिकारियों तथा विभिन्न रूप से प्रभावित कर अनुबंध कराने की व्यवस्था कराने वाले स्कूल गुरू के लिए हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ समुचित कालर्व करने की अनुशंसा की है ताकि भवष्य में इस तरह के कार्यों की पुनरावृत्ति नहीं हो सके। अन्य हस्ताक्षरकर्ता को भी चेतावनी दी जानी चाहिए।

मालूम हो कि इस अनुबंध के विरोध में जब विभिन्न छात्र संगठनों ने आंदोलन किया और इसका विरोध सिंडीकेट की बैठक में भी हुआ तो सिंडीकेट ने अनुबंध के विभिन्न अवयवों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। विश्वविद्यालय ने सिंडीकेट के निर्णय के आलोक में 31अक्टुबर 2018 को पत्र निर्गत कर कमेटी के सदस्यों को जांच करने को कहा। कमेटी में सिंडीकेट के तीन सदस्यों (सभी विधायक) संजय सरावगी, लक्ष्मेश्वर राय तथा फैयाज अहमद को शामिल किया गया। कमेटी ने 1 मार्च को सिंडीकेट की बैठक में अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। अब यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए गले की हड्डी साबित हो रही है क्योंकि न निगलते बनता है और नही उगलते।

कमेटी स्कूल गुरू के कोष में जमा राशि तुरंत अंतरित कर दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में जमा करने तथा विश्वविद्यालय को आइसीटी से संबंधित आधारभूत संरचनाओं से संपन्न करने की भी अनुशंसा की है।

जांच कमेटी के आकलन के अनुसार स्कूल गुरू को निदेशालय की वर्तमान स्थिति के आधार पर साल में 13 करोड़, 32 लाख, 92 हजार 10 रुपये और पांच वर्षों में 66 करोड़, 64 लाख, 60 हजार, 50 रूपये की आय होगी। प्रत्येक वर्ष छात्रों की संख्या में इजाफा के साथ यह आय और अधिक होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक छोटा अंश खर्च कर आइसीटी की आधारभूत संरचनाओं को विकसित किया जा सकता है और लोगों को नियोजन भी मिलेगा। निदेशालय के एक आकलन में इस पर होने वाले खर्च को करीब 50 लाख रूपये आंका गया है। बाद में विश्वविद्यालय ने अपने आकलन के आधार पर इस पर संभावित व्यय 52 से 70 करोड़ आंका है। रिपोर्ट में कहा गया कि इतने बड़े अनुबंध के लिए न तो अखवार में विज्ञापन निकाला गया और नहीं डेमो में दूसरी कंपनी को आमंत्रित किया गया। डेमो में किसी आईटी विशेषज्ञ को भी शामिल नहीं किया गया। अकेले स्कूल गुरू के प्रतिनिधियों को बुला डेमो देखकर अनुबंध का निर्णय कर लिया गया। इसे बेहद आपत्तिजनक बताया गया है। कहा गया कि यह निहित स्वार्थ से प्रेरित पार्टी से मिलीभगत कर कार्य आवंटित कर दिया गया। कहा गया कि इसमें विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, निदेशालय के अधिकारी एवं स्कूल गुरू के हस्ताक्षरकर्ता मुख्य रूप से सम्मलित हैं। संपर्क करने पर कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने बताया कि सिंडीकेट की पिछली बैठक में जाँच रिपोर्ट सौंपी गई। बैठक में यह हुआ कि अगली बैठक में इस पर चर्चा की जाय। विश्वविद्यालय प्रशासन सिंडीकेट के निर्णय अनुबंध के बिंदुओं और विधिक राय के बाद इस पर अग्रेतर कार्रवाई करेगा।

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  • Web Title:Probe Committee recommends cancellation of contract with school c