
प्रसव पीड़ा से देर तक छटपटाती रही गर्भवती, नहीं मिली ट्रॉली
दरभंगा में एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से परेशान होकर डीएमसीएच के गायनी विभाग पहुंची। ट्रॉली न मिलने पर परिजनों ने ई रिक्शा का सहारा लिया। महिला को तत्काल मातृ-शिशु अस्पताल ले जाना जरूरी था, लेकिन ट्रॉली कर्मी गायब थे। डॉक्टर ने मामले की जानकारी लेकर ट्रॉली उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
दरभंगा। डीएमसीएच के गायनी विभाग में बुधवार की शाम गर्भवती प्रसव पीड़ा से छटपटाती रही। इधर-उधर दौड़ने के बावजूद महिला को वहां से मातृ- शिशु अस्पताल ले जाने के लिए ट्राली नहीं मिली। आखिरकार परिजनों को ई रिक्शा भाड़ा कर उसे एमसीएच तक ले जाना पड़ा। पुराने गायनी विभाग में ओपीडी का संचालन होने के बावजूद ट्राली कर्मी का गायब रहना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। सिमरी थाना क्षेत्र के बनौली निवासी अनिल ठाकुर की गर्भवती पत्नी राखी देवी को गायनी विभाग में संध्याकालीन ओपीडी में लाया गया। महिला प्रसव पीड़ा से परेशान थीं। वहां से उसे अविलंब एमसीएच पहुंचा जरूरी था।
साथ आए परिजन श्याम ठाकुर ट्रॉली चालक को ढूंढने लगे। वहां न तो चालक दिखा और न ही ट्रॉली। इसके बाद वे भागे-भागे एमसीएच पहुंचे। वहां भी उन्हें ट्रॉली नहीं मिली। वहां से लौटने के बाद परिजन काफी देर तक ट्रॉली का इंतजार करते रहे। जब ट्रॉली उपलब्ध नहीं हुई तो गर्भवती को एमसीएच ले जाने के लिए उनलोगों ने एक ई रिक्शा रोका। वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित एमसीएच तक पहुंचाने के लिए चालक ने 100 रुपए की मांग की। परेशान परिजन क्या करते। आनन-फानन में वे गर्भवती को लेकर एमसीएच रवाना हो गए। दरअसल ओपीडी का संचालन पुराने गायनी विभाग में होता है। लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर एमसीएच में हैं। परिजन श्याम ठाकुर ने बताया कि काफी देर तक ट्रॉली का इंतजार करने के बाद महिला को ई रिक्शा से एमसीएच ले जाना पड़ा। उपाधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस सिलसिले में उन्हें फोन पर सूचना दी गई थी। उन्होंने सुपरवाइजर को अविलंब ट्रॉली उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया कि सुपरवाइजर को ड्यूटी चार्ट के साथ बुलाया गया है।

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