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उच्च संभावनाओं वाला कृषि उद्योग है मखाना : डॉ. नचिकेत

उच्च संभावनाओं वाला कृषि उद्योग है मखाना : डॉ. नचिकेत

संक्षेप:

दरभंगा के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य मखाना उत्पादन, बीज गुणवत्ता, प्रसंस्करण और निर्यात से संबंधित अनुसंधान को नई दिशा देना था। केंद्र निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने बताया कि मखाना एक पारंपरिक फसल से अधिक है, जो कृषि उद्योग में उच्च संभावनाएं रखता है।

Feb 10, 2026 12:33 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा। शहर के दिल्ली मोड़ स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में केंद्र निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले की अध्यक्षता में सोमवार को मखाना से जुड़े अनुसंधान को नई दिशा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर की विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का उद्देश्य मखाना उत्पादन, बीज गुणवत्ता, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन एवं निर्यात से संबंधित प्राथमिक शोध क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें संगठित अनुसंधान परियोजनाओं के रूप में आगे बढ़ाना था। निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि मखाना केवल एक पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि किसानों, उद्यमियों और निर्यात क्षेत्र के लिए उच्च संभावनाओं वाला कृषि उद्योग है। बीज से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक वैज्ञानिक मानकीकरण एवं प्रमाणीकरण आधारित अनुसंधान से ही इस क्षेत्र को स्थायी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

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प्रस्तावित शोध परियोजनाएं मखाना वैल्यू चेन के प्रत्येक घटक को सुदृढ़ करेंगी। इस परिचर्चा में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आईएस सिंह, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. बीआर जाना, एसएम राउत एवं डॉ. एसबी तराते के साथ-साथ सीफेट, लुधियाना के डॉ. आरके विश्वकर्मा एवं ई. राहुल यादव, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के शोधकर्ताओं ने भी भाग लिया। इसके अतिरिक्त मखाना क्षेत्र से जुड़े मशीन उत्पादक, प्रसंस्करण उद्यमी एवं उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिससे अनुसंधान और व्यावहारिक जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय पर व्यापक चर्चा संभव हो सकी। बैठक में मखाना बीज की गुणवत्ता का चरित्रांकन, बीज उत्पादन प्रोटोकॉल, बीजों की कटाई, सफाई, ग्रेडिंग, भंडारण, पैकेजिंग एवं टैगिंग जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। साथ ही बीज प्रमाणीकरण एवं वितरण की प्रक्रिया, बीज परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना, तथा प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कच्चे बीज, प्राथमिक भुने बीज एवं मखाना फल के चरित्रांकन, पैकेजिंग और भंडारण से संबंधित मानकों पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन सभी विषयों को समाहित करते हुए समेकित शोध परियोजनाएं शीघ्र ही राष्ट्रीय मखाना बोर्ड को प्रस्तुत की जाएंगी, ताकि मखाना आधारित अनुसंधान को गति मिले और इससे मखाना किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, उद्यमियों तथा निर्यात क्षेत्र को ठोस वैज्ञानिक आधार पर लाभ पहुंचाया जा सके।