DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

न्याय के लिए आदर्श रही है मिथिला नगरी

न्याय के लिए आदर्श रही है मिथिला नगरी

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में जारी संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का चौथा दिन रविवार विशेष रहा। इस दौरान आयोजित शास्त्रार्थ कार्यक्रम में पटना हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीश भी शामिल हुए। सभी ने मुक्त कंठ से देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कुलपति प्रो.सर्व नारायण झा द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की एवं कुछ जरूरी सलाह भी दिए।

सबसे पहले कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय ने कहा कि न्याय के क्षेत्र में मिथिला का बड़ा योगदान रहा है। न्याय के लिए यहां आदिकाल में ही कई सूत्र प्रतिपादित किये गए हैं। न्याय मीमांसा व न्याय दर्शन पर मिथिला के विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक तरह से कहें तो मिथिला न्याय के लिए आदर्श रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्कृत विश्वविद्यालय न्याय मीमांसा से सम्बंधित सूत्रों को संकलित करे, विधि की व्याख्या करे। न्याय पर हुए कार्यों को विश्वविद्यालय आगे बढ़ाए।

न्यायाधीश श्री उपाध्याय ने कहा कि शास्त्रार्थ बहुत पुरानी परंपरा रही है। इस परम्परा को जीवंत कर भी हम संस्कृत को विकसित व संवर्धित कर सकते हैं और अपने यहां की प्राचीन परम्पराओं का पाश्चात्य में कोई विकल्प भी नहीं रहा है। यहां की परम्परा उन्नत रही है। हम विपक्षी की भी सुनते हैं। प्रजातंत्र की मूल भावना भी तो यही है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भाषा व साहित्य में अंतर है। बोलचाल में तो त्रुटि क्षम्य है। हम जो कहना चाहते हैं वह समझ में आ जाये यह तो ठीक है, लेकिन साहित्य के मामले में ऐसा नहीं हो सकता। राधाकृष्णन की एक पुस्तक को संदर्भित करते हुए न्यायमूर्ति श्री उपाध्याय ने कहा कि मंडन मिश्र की पत्नी भारती की चर्चा पहली न्यायाधीश के रूप में की गई है। भारती ने स्व से ऊपर उठकर शास्त्रार्थ के मौके पर फैसला सुनाया था। रजभवन, पटना में संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा हाल में ही आयोजित शास्त्रार्थ की भी उन्होंने प्रशंसा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायाधीश प्रभात कुमार झा ने मैथिली में अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत के उत्थान के लिए ऐसा कार्यक्रम बराबर होना चाहिए। मिथिला का गुणगान करते हुए न्यायमूर्ति श्री झा ने कहा कि एक समय था कि यहां के पशु-पक्षी भी संस्कृत में बात करते थे। यह कालांतर की बात हो गयी है। संस्कृत देवभाषा है। इसका न्याय के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है। इसी क्रम में उन्होंने सुलभ न्याय की भी चर्चा की। उन्होंने अफसोस जताया कि इन दिनों पाश्चात्य सभ्यता हावी हो रही है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष न्यायाधीश राजेन्द्र मिश्र ने कहा कि संस्कृत विश्व की धनी वैज्ञानिक भाषा है। मुगल काल तक यह जन-जन की भाषा थी। बाद में इसका ह्रास होने लगा और आज यह सीमित हो गयी है। उन्होंने संस्कृत को सरल भाषा बताते हुए कहा कि इसके वाचन व लेखन में समानता है जो अन्य भाषा में नहीं है। संस्कृत फिर से जनसामान्य तक पहुंचे इस पर प्रयास तेज करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि साहित्य से लोग अधिक आचार्य कर रहे हैं जबकि व्याकरण व ज्योतिष विषयों के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। इसपर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने संस्कृत के साथ अंग्रेजी की युक्ति को अहम बताते हुए कहा कि देवभाषा का भविष्य उज्ज्वल है।

दरभंगा में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग

अतिविशिष्ट अतिथि स्थानीय सांसद गोपाल जी ठाकुर ने शास्त्रार्थ परम्परा को जीवित करने के लिए कुलपति प्रो. झा को धन्यवाद दिया। उन्होंने तीनों न्यायाधीशों से दरभंगा में हाईकोर्ट का बेंच स्थापित करने की मांग की। सांसद ने तर्क दिया कि इससे गंगा नदी के इसपार के कम से कम 14 जिलों के लोगों को न्यायिक कार्यों में सहूलियत होगी और त्वरित न्याय भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह तभी सम्भव है जब आप सभी न्यायमूर्ति उक्त बेंच की प्रासंगिकता पर अपनी मुहर लगाएंगे। उन्होंने संस्कृत के विकास में हर सम्भव मदद का भरोसा भी दिया।

विवि के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि प्रो. श्रीपति त्रिपाठी के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सुरेश्वर झा एवं प्रो. विद्येश्वर झा के बीच ‘आत्मवाद दर्शन विषय पर जोरदार शास्त्रार्थ हुआ। आत्मा नश्वर है या अमर है, इस बिंदु पर लम्बा तर्क चला। बीच-बीच में खुद कुलपति प्रो. झा सवाल खड़े कर रहे थे और उसका जवाब पूर्व पक्ष व उत्तर पक्ष से दिया जा रहा था। इसके बाद व्याकरण के ‘हलनतयम विषय पर डॉ. विजय कुमार मिश्र एवं प्रियंका तिवारी के बीच शास्त्रार्थ हुआ। धन्यवाद ज्ञापन डीन प्रो. शिवाकांत झा ने किया। विषय प्रवेश कुलपति प्रो. झा ने किया। इसके पूर्व सभी न्यायाधीशों समेत सांसद को पाग-चादर के साथ स्मृति चिह्न भी प्रदान किया गया।

फोटो

18 अगस्त संस्कृति यूनिवर्सिटी 1 : रविवार को कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के सभागार में शास्त्रार्थ करते विद्वान व मौजूद सांसद गोपालीजी ठाकुर, कुलपति प्रो.सर्व नारायण झा, हाई कोर्ट के जज अनिल कुमार उपाध्याय, राजेंद्र मिश्र व प्रभात कुमार झा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Mithila city has been the norm for justice