डीएमसीएच में मेडिकल छात्रों का हंगामा, पैथोलॉजी में तोड़फोड़

Newswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा में डीएमसीएच के क्लीनिकल पैथोलॉजी विभाग में मेडिकल छात्रों ने अपने सहपाठी की पिटाई के विरोध में हंगामा किया। छात्रों ने डाटा ऑपरेटर की पिटाई की और विभाग में तोड़फोड़ की, जिससे कामकाज ठप रहा। अस्पताल प्रशासन ने आरोपित को बर्खास्त करने का निर्णय लिया और बाद में स्थिति सामान्य हुई।

डीएमसीएच में मेडिकल छात्रों का हंगामा, पैथोलॉजी में तोड़फोड़

दरभंगा। डीएमसीएच के सर्जिकल भवन स्थित क्लीनिकल पैथोलॉजी विभाग में गुरुवार को मेडिकल छात्रों ने जमकर हंगामा किया। सहपाठी की पिटाई से आक्रोशित दर्जनों छात्रों ने गुरुवार को विभाग पर धावा बोल दिया। डाटा ऑपरेटर की पिटाई कर दी। पैथोलॉजी विभाग में तोड़फोड़ की। इससे वहां अफरातफरी मच गई। हंगामे के कारण इमरजेंसी और क्लीनिकल पैथोलॉजी में करीब तीन घंटे तक कामकाज ठप रहा। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ा। छात्रों का आरोप था कि बुधवार को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कहासुनी के दौरान एक डाटा ऑपरेटर ने उनके साथी छात्र की पिटाई कर दी थी। गुरुवार को जब छात्र आरोपित की तलाश में विभाग पहुंचे और दरवाजा बंद पाया।

इसके बाद उन्होंने गुस्से में दरवाजे के शीशे तोड़ दिए। छात्रों के आक्रोश को देख लैब टेक्नीशियन और डाटा ऑपरेटर जान बचाने के लिए कमरों में दुबक गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जिसकी भनक लगते ही छात्र वहां से निकल गए।अधीक्षक की पहल पर वार्ता, ऑपरेटर बर्खास्त: अस्पताल अधीक्षक ने स्वास्थ्य कर्मियों और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया। छात्रों की मांग और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधीक्षक ने आउटसोर्सिंग एजेंसी को आरोपित डाटा ऑपरेटर को अविलंब बर्खास्त करने का निर्देश दिया। दोपहर 3:30 बजे के बाद दोबारा कामकाज शुरू हो सका।मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया गया है। आरोपित डाटा ऑपरेटर को हटाने का निर्देश आउटसोर्सिंग एजेंसी को दिया गया है। सभी पक्षों से बात कर गतिरोध दूर कर दिया गया है ताकि मरीजों को आगे परेशानी न हो।-डॉ. सुरेंद्र कुमार, उपाधीक्षक, डीएमसीएचइलाज के लिए भटकते रहे मरीज और परिजनहंगामे और असुरक्षा से आहत कर्मियों ने क्लीनिकल पैथोलॉजी, इमरजेंसी पैथोलॉजी और पुराने ओपीडी भवन स्थित सैंपल कलेक्शन सेंटर में काम बंद कर दिया। इसका सबसे बुरा असर उन मरीजों पर पड़ा जो दूर-दराज से जांच के लिए आए थे। इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के परिजन हाथ में ब्लड सैंपल लेकर घंटों इधर-उधर भटकते रहे। हंगामे के कारण न तो नए सैंपल लिए गए और न ही बुधवार की रिपोर्ट मिल सकी। इससे कई मरीजों को बिना जांच कराए ही बैरंग लौटना पड़ा।

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