महारानी के अंतिम दर्शन को उमड़े शहरवासी
दरभंगा की महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की खबर पर लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। उनकी सामाजिक सेवाओं और कार्यों की चर्चा होती रही। उन्होंने महाराज कामेश्वर सिंह की स्मृति में कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए और राज्य सरकार के मंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।
दरभंगा। महारानी अधिरानी कामसुन्दरी साहिबा के निधन की खबर मिलते ही सोमवार की सुबह बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। शहर के बाध मोड़ स्थित कल्याणी निवास के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसके अलावा माधेश्वर परिसर में भी लोगों ने पहुंचकर उन्हें नमन किया। महारानी के निधन की खबर मिलते ही लोग एक-दूसरे से फोन पर इसकी सत्यता की पुष्टि करने लगे। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी लोग महारानी को श्रद्धांजलि देने लगे। माधेश्वर परिसर में पहुंचे लोग महारानी के सामाजिक कार्यों के बारे में चर्चा कर रहे थे। मीना झा, प्रियांशु झा, संतोष चौधरी आदि ने कहा कि महारानी कामसुंदरी देवी को सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता था।
उन्होंने अपने पति महाराज कामेश्वर सिंह की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसमें उन्होंने 15 हजार से अधिक दुर्लभ पुस्तकें तथा पांडुलिपियां दी थीं। इसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई काम किए गए। इससे समाज के कमजोर वर्गों को लाभ मिला। महारानी कामसुन्दरी देवी का जन्म मधुबनी जिले के मंगरौनी में पंडित हंसमणि झा के घर चौथी पुत्री के रूप में 22 अक्टूबर 1932 को हुआ था। उनका विवाह पांच मई 1943 को हुआ था। महारानी कामसुंदरी देवी महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का पहले ही निधन हो चुका है। महारानी कामेश्वरी प्रिया के नाम पर ही दरभंगा शहर में कामेश्वरी प्रिया पूअर होम बना हुआ है। महारानी कामसुंदरी देवी के निधन की सूचना मिलने पर राज्य सरकार की ओर से उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल व समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी सहित डीएम कौशल कुमार, संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय व कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने श्रद्धांजलि दी। उनकी अंत्येष्टि में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इनमें संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति पं. रामचन्द्र झा, पं. शशिनाथ झा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम डब्ल्यूआईटी के निदेशक प्रो. अजयनाथ झा, पंकज ठाकुर, लनामिवि के सीनेट सदस्य डॉ. संतोष कुमार, शशि मोहन, डॉ. मंजर सुलेमान, डॉ. सुशांत भास्कर, डॉ. अवनीन्द्र कुमार झा, पं .लक्ष्मीनाथ झा, डॉ. जमील हसन अंसारी आदि थे। बिहार सरकार के उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। वे गरिमा, सेवा और संस्कार की प्रतिमूर्ति थीं। सामाजिक, सांस्कृतिक एवं परोपकार के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके निधन से न केवल दरभंगा राज परिवार बल्कि सम्पूर्ण मिथिलांचल ने एक स्नेहिल एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है। मैं उनके अंतिम संस्कार में सम्मिलित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रो. आदित्य नारायण मन्ना, रंगनाथ ठाकुर, बद्री पूर्वे, मीना झा, विनोद सहनी, सूरज चौधरी, गुलशन चौधरी, दीपक खर्गा, राजू मंडल, अमित बिहारी, मुरली कुमार, विशाल महासेठ, अंकुर गुप्ता थे।

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