
वार्ड 23 में आवेदन भरने की व्यवस्था से सुविधा
वार्ड 23 में स्थानीय पार्षद ने बुजुर्गों के लिए जीवन प्रमाणीकरण पेंशन आवेदन की सुविधा शुरू की है। इससे बुजुर्गों को दूर जाने और पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ी। समाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को तकनीक-सक्षम करने में सभी वर्गों का ध्यान रखना चाहिए ताकि जरूरतमंद लोग पेंशन से वंचित न रहें।
वार्ड 23 का उदाहरण इस मामले में सामने आया है, जहां स्थानीय पार्षद ने अपनी ओर से पहल करते हुए लोगों की सुविधा के लिए जीवन प्रमाणीकरण पेंशन आवेदन भरने की व्यवस्था कराई है। वार्ड में रहने वाले बुजुर्गों ने बताया कि पार्षद की इस पहल से उन्हें काफी सहूलियत मिली है। उन्हें न तो दूर जाना पड़ा और न ही अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़े। लोगों का कहना है कि यदि अन्य वार्डों में भी इसी तरह की व्यवस्था की जाए, तो वृद्धजनों की समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो सकता है। गरीब और असहाय बुजुर्गों की स्थिति और भी चिंताजनक है।
कई ऐसे लोग हैं जो अकेले रहते हैं या जिनका सहारा कोई नहीं है। वे ठंड में लाठी या सहारे के सहारे साइबर कैफे तक पहुंचते हैं। रास्ते में फिसलने, ठंड लगने या तबीयत बिगड़ने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके, पेंशन की उम्मीद में वे यह जोखिम उठाने को मजबूर हैं, क्योंकि यही पेंशन उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को डिजिटल प्रक्रिया लागू करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि सभी वर्ग समान रूप से तकनीक-सक्षम नहीं होते। बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुलभ नहीं बनाया गया तो कई वास्तविक जरूरतमंद लोग पेंशन से वंचित रह सकते हैं। कुल मिलाकर वृद्धा पेंशन के लिए शुरू की गई जीवन प्रमाणीकरण आवेदन प्रक्रिया ने बुजुर्गों की परेशानी बढ़ा दी है। कड़ाके की ठंड, साइबर कैफे की मनमानी, बार-बार के चक्कर और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम, इन सबके बीच वृद्धजन खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि सरकार, नगर निगम और जनप्रतिनिधि मिलकर जमीनी स्तर पर ऐसी व्यवस्था करें, जिससे बुजुर्गों को सम्मान और सुविधा के साथ पेंशन का लाभ मिल सके।

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