स्वयं-मूक्स को अंगीकार करने में विवि प्रथम : वीसी

Jan 29, 2026 12:00 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत ऑनलाइन स्वयं-मूक्स को अपनाने वाला बिहार का पहला विश्वविद्यालय बनने का गौरव प्राप्त किया है। कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने इसकी जानकारी दी। विश्वविद्यालय में पिछले वर्ष 95 शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित हुए और 507 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

स्वयं-मूक्स को अंगीकार करने में विवि प्रथम : वीसी

दरभंगा, नगर संवाददाता। नई शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप लनामिवि स्वयं-मूक्स को अंगीकार करने वाला राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। यह शिक्षा विभाग, भारत सरकार का फ्री ऑनलाइन कोर्सेज का ओपन प्लेटफार्म है। अब कोई भी छात्र-छात्रा वर्ग अध्ययन के अतिरिक्त मूक्स के माध्यम से ऑनलाइन अध्ययन का लाभ ले सकते हैं। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सीनेट की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने ये बातें कही। जुबली हॉल में बुधवार को आयोजित बैठक में अपने अभिभाषण में कुलपति प्रो. चौधरी ने बताया कि राज्यपाल सचिवालय, लोक भवन एवं राज्य के शिक्षा विभाग का निरंतर प्रयास और निर्देश है कि राज्य के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में सभी कार्यालयी कार्य समर्थ पोर्टल के माध्यम से ही संपादित किये जाएं।

इस दिशा में हम क्रियाशील हैं। इसके अंतर्गत 44 मॉड्यूल हैं। इसमें विश्वविद्यालय स्तर पर लीव मॉड्यूल एक जनवरी से लागू हो गया है। पे-रोल मैनेजमेंट मॉड्यूल तथा पेंशन मॉड्यूल भी अतिशीघ्र लागू हो जाएगा। विवि के बाद कॉलेज स्तर पर भी इसे लागू किया जाएगा। विगत एक वर्ष की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कुलपति ने सदन को बताया कि विवि के स्नातकोत्तर विभागों में बीते वर्ष में 95 शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। 2024 की तुलना में यह संख्या लगभग दो गुनी है। मैथिली और पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट की ओर से शोध पत्रिका एवं पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। एमबीए डिपार्टमेंट के 33 स्टूडेंट का प्लेसमेंट विभिन्न निजी बैंकों एवं संस्थानों में हुआ है। स्नातक प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2025-29) में एक लाख 61 हजार 639 तथा पीजी प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2025-27) में 16 हजार 870 छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया है। ये आंकड़े पिछले सत्रों से अधिक हैं जो विवि के प्रति लोगों के रुझान को दर्शाता है। बीते वर्ष 507 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है, जो एक रिकॉर्ड है। कुलपति ने कहा कि भौतिकी विभाग में फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर कौशल विकास के अध्ययन एवं सफल संचालन के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज के आलोक में तैयार अध्यादेश एवं नियम-परिनियम के प्रारूप को अनुमोदित करते हुए निर्णय किया गया है कि फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर कौशल विकास से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कोर्स की पढ़ाई प्रारंभ की जाए। बेगूसराय में डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन लैंग्वेज का विस्तार केंद्र, दिनकर चेयन ऑफ रिसर्च सेंटर व लनामिवि का इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। सत्र 2026-27 से खेल एवं शारीरिक शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत चार वर्षीय बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) इंटीग्रेटेड कोर्स चलाने का निर्णय लिया गया है। इस निदेशालय का मुख्य उद्देश्य खेल, सांस्कृतिक एवं शारीरिक शिक्षा गतिविधियों को समुन्नत बनाना है। पांच वर्ष बाद दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया और 25 अभ्यर्थी को गोल्ड मेडल सहित 1122 छात्र-छात्राओं को मूल उपाधि प्रदान की गई। कुलपति ने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से माइग्रेशन एवं प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिये जाने से छात्र-छात्राओं को काफी सहूलियत हुई। परीक्षाफल संबंधी समस्याओं का निराकरण भी ऑनलाइन ग्रिवांस पोर्टल के माध्यम से हो रहा है। पीजी एवं प्रोफेशनल कोर्स की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल स्कैनिंग से कराये जाने की योजना बनायी जा रही है। इससे रिजल्ट अल्प समय में हो जाएगा। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से अनुशंसित 15 प्रधानाचार्य एवं विभिन्न विष्ज्ञयों में 426 सहायक प्राचार्य की नियुक्ति की गई है। 19 विषयों में 259 सहायक प्राचार्य को लेवल 10 से 11 में प्रोन्नति प्रदान की गई है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर 18 तृतीय एवं 18 चतुर्थ वर्ग के पदों पर अनुकंपा पाल्यों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है। विवि एवं कॉलेजों में कार्यरत बचे हुए पांच शिक्षकेतर कर्मियों को भी वेतनमान सहित प्रभार दिया गया है। गत वर्ष दो डिग्री कॉलेजों को अस्थायी संबंधन, दो कॉलेजों को स्थायी, एक कॉलेज को विज्ञान संकाय में स्थायी और एक को अस्थायी तथा एवं कॉलेज का संबंधन दीर्घीकरण प्रदान किया गया। दो बीएड कॉलेजों में एमए इन एजुकेशन के लिए दो सत्रों के लिए अस्थायी संबंधन प्रदान किया गया है। गत सदन की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में 19 अंगीभूत कॉलेजों में गैर प्रायोगिक विभिन्न विष्ज्ञयों में पीजी की पढ़ाई शुरू की गई है। बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट सहित संबंधन एवं नई शिक्षण कार्यक्रम समिति तथा विद्वत परिषद से अनुशंसित विभिन्न प्रस्तावों को पारित किया गया। कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हंसदा के संचालन में आयोजित बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल, एफए इंद्र कुमार, विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी, डॉ. मुरारी मोहन झा, मीना कुमारी, सुजीत कुमार पासवान, अजय कुमार, एमएलसी डॉ. मदन मोहन झा, घनश्याम ठाकुर, पूर्व एमएलसी डॉ. दिलीप कुमार चौधरी, डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू, शिक्षाविद संत कुमार चौधरी, रालोजपा जिलाध्यक्ष गगन कुमार झा, विवि के संकायाध्यक्ष, कई पीजी विभागाध्यक्ष, प्रधानाचार्य सहित विवि के पदाधिकारी, शिक्षक व कर्मी उपस्थित थे।

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