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एलएनएमयू: सवा दो करोड़ से परिसर का हो रहा सौंदर्यीकरण

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Fri, 09 Jul 2021 06:01 PM
एलएनएमयू: सवा दो करोड़ से परिसर का हो रहा सौंदर्यीकरण

दरभंगा। निज प्रतिनिधि

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की स्थापना का पांच अगस्त को गोल्डेन जुबली समारोह होगा। साथ ही विश्वविद्यालय के साथ जुड़े नाम स्व. ललित नारायण मिश्र का यह जन्मशत वार्षिकी भी है। इसी के आलोक में सौंदर्यीकरण का काम शुरू किया गया है। नैक से विश्वविद्यालय का मूल्यांकन भी होना है। सौंदर्यीकरण पर करीब सबा दो करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके तहत करीब एक दर्जन परियोजनाओं को ससमय पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। खासियत यह है कि इन्हें विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रोतों से हुई आय से पूरा किया जा रहा है। हालांकि काम शुरू होने के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया है। मामला राज्य सरकार के शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय के मुख्य भवन जहां कार्यालय है, के सटे उत्तर स्थित तालाब का सौंदर्यीकरण विश्वविद्यालय का अभियंत्रण कोषांग कर रहा है जबकि अन्य परियोजनाओं का कार्यान्वयन संवेदक कर रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में कुल 13 तालाब हैं। इनमें एक तालाब का सौंदर्यीकरण विश्वविद्यालय स्वयं करा रहा है जबकि शेष एक दर्जन तालाबों के सौंदर्यीकरण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने डीएम को पत्र लिखकर ‘जल जीवन हरियाली योजना के तहत संरक्षण व सौंदर्यीकरण के लिए अनुरोध किया है। विश्वविद्यालय कार्यालय से सटे उत्तर स्थित तालाब के चारों किनारों को मजबूत करने के लिए ब्रिक सोलिंग सहित अन्य सुरक्षात्मक काम हो रहे हैं। इससे किनारे की मिट्टी नहीं खिसकेगी। इसके अलावा तालाब के पूरब-दक्षिण कोने पर परिसर का एकमात्र विशाल भोजपत्र का पेड़ है। इससे इस वृक्ष को भी सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही तालाब के पूर्वी व पश्चिमी भिंडे पर छह फीट आरसीसी सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। इससे सुबह-शाम सैर करने वालों को सहूलियत होगी। इसके अलावा भिंडों पर सीमेंट कंक्रीट के करीब दर्जनभर बेंचों का निर्माण कराया जायेगा। पौधे भी लगाये जायेंगे। इन्हीं परियोजनाओं के तहत केंद्रीय पुस्तकालय के ऊपर एक और तल का निर्माण किया जायेगा। परिसर में मोती महल से मनोकामना मंदिर को जोड़ने के लिए पीसीसी सड़क निर्माण, नरगौना के लीची गेट से बीएड नियमित की कक्षा होने वाली जगह को जोड़ने की भी योजना है। इधर, विश्वविद्यालय से सटे तालाब के उत्तर-पूर्व से अनिर्मित ऑडिटोरियम की बनी नींव के ऊपर पार्क का निर्माण हो रहा है। वहां सीमेंट बेंच के अलावा छतरी भी लगाई जायेगी ताकि वहां बैठकर लोग नजारा देख सकें। ठीक इसके बगल में एक जलाशय का निर्माण कराया गया है ताकि मुख्य तालाब के अतिरिक्त पानी का इसमें संचयन किया जा सके।

पूर्व वीसी के कार्यकाल में मिली थी स्वीकृति:

एआईएच विभाग सहित वहां के अन्य भवनों की सुरक्षा के मद्देनजर चहारदीवारी का निर्माण होगा। इसके साथ ही परिसर स्थित कई भवनों का रंग-रोगन होगा। भौतिकी विभाग की छत से पानी रिसता है। अत: इसकी छत का एपीसी कराया जा नहा है। नरगौना के सामने और पीछे जर्जर सड़कों को पीसीसी सड़कों में तब्दील किया जायेगा ताकि शिक्षक-छात्रों को हो रही कठिनाई दूर हो सके। कुल मिलाकर नौ परियोजनाओं पर करीब सबा दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनमें से अधिकतर योजनाओं को पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह के कार्यकाल में ही विभिन्न निकायों से स्वीकृति मिल चुकी थी लेकिन कार्यान्वयन अब हो रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना सरोह आयोजन समिति की बैठक में इसे तत्काल कार्यान्वयन का निर्णय लिया गया और इसके बाद काम शुरू हुआ है।

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