केवीके जाले में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण संपन्न
केवीके जाले में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां 35 प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बीच कदन्न (श्री अन्न) की उपयोगिता को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने रागी और बाजरा जैसे फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण के लाभों पर चर्चा की।

कमतौल/जाले, हिटी। केवीके जाले में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन प्रमाणपत्र वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम बिहार पोषक अनाज मूल्य श्रृंखला उत्कृष्टता केंद्र, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के सौजन्य से आयोजित हुआ। वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. दिव्यांशु शेखर ने 35 प्रशिक्षुओं को बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कदन्न (श्री अन्न) की बढ़ती उपयोगिता को रेखांकित करना है। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुसार श्री अन्न का उत्पादन व प्रसंस्करण किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा। संचालिका डॉ. पूजा कुमारी ने बताया कि रागी कुकीज व बाजरा आटा जैसे संसाधित उत्पादों से किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिलता है।
बरेली केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने श्री अन्न की उन्नत खेती विधि पर विस्तार से जानकारी दी। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने रागी पर, कृषि अभियंत्रिकी ई. निधि कुमारी ने खेती तकनीक पर तथा फॉर्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार ने मोटे अनाज में लगने वाले कीट एवं रोग प्रबंधन की जानकारी साझा की।
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