सड़क पर रात के सफर को मुश्किल बना रही हाई बीम लाइट, पाबंदी लगाए प्रशासन
शहर और इसके बाहरी इलाकों में तेज रोशनी वाले वाहनों का आतंक बढ़ रहा है, जिससे बाइक और साइकिल सवारों की आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे संतुलन बिगड़ने और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। लोग प्रशासन की उदासीनता से नाराज हैं क्योंकि इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
शहर और इसके बाहरी इलाकों में रात होते ही मुख्य सड़कों पर तेज रोशनी वाले वाहनों का आतंक बढ़ता जा रहा है। खासकर बाइक और साइकिल सवारों के लिए यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। सामने से आने वाले वाहनों की इतनी तेज और चमकीली रोशनी होती है कि कई बार दोपहिया वाहन सवारों की आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे न केवल उनका संतुलन बिगड़ जाता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह समस्या कोई नई नहीं है। बीते कई महीनों से शहर के बाहरी हिस्सों जैसे लहेरियासराय-केवटी रोड, विश्वविद्यालय रोड, दरभंगा-मधुबनी रोड और हायाघाट क्षेत्र के रास्तों पर यह दिक्कत लगातार बढ़ रही है।

तेज रोशनी जिसे आम तौर पर हाई बीम कहा जाता है, इतनी तीव्र होती है कि सामने से आ रहे वाहन चालक कुछ क्षणों के लिए कुछ भी नहीं देख पाते। ऐसे में गड्ढे, मोड़ या सामने से आ रहे वाहन का आकलन ठीक से नहीं हो पाता, जो हादसे का प्रमुख कारण बनता है। हाल के दिनों में वाहनों की तेज रोशनी सड़क हादसों में वृद्धि का कारण भी बन रही है। शहर में कई बाइक सवारों ने बताया कि तेज रोशनी से होने वाले हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई लोग अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि अक्सर हाई बीम से आंखें चौंधिया जाती हैं और सड़क का दृश्य कुछ पल के लिए धुंधला हो जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक सामने आए वाहन या सड़क किनारे खड़े व्यक्ति को देखने में देर हो जाती है, जो दुर्घटना को आमंत्रित करता है। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि रात में जब घर वापस लौटते हैं तो कई बार ऐसा लगता है कि सामने से आ रहा वाहन हमें देख ही नहीं पा रहा। उसकी रोशनी इतनी तेज होती है कि हमारी आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। कई बार तो संतुलन बिगड़ने के कारण बाइक गिरते-गिरते बची है। शहर के पास के गांवों में रहने वाले कई युवाओं ने भी बताया कि तेज रोशनी के कारण उन्हें अक्सर सड़क पर कुछ क्षण रुककर अपनी आंखों को सामान्य करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर दुर्घटना होने लगे तो मदद करने वाला भी आसपास नहीं होता, क्योंकि इन सड़कों पर देर रात आवाजाही कम होती है। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन का इसपर बिल्कुल ध्यान नहीं है। सबसे चिंता की बात यह है कि इस समस्या पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सड़क पर नियमित गश्त करने वाली पुलिस, ट्रैफिक विभाग और यातायात विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। न तो चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, न ही हाई बीम का दुरुपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। कई लोगों ने कहा कि शहर में जब हेलमेट, प्रदूषण जांच या वाहनों के अन्य कागजात की जांच के लिए अभियान चल सकता है तो फिर हाई बीम पर क्यों नहीं? तेज रोशनी भी तो सड़क सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। फिर भी इस पर कार्रवाई शून्य है। कई साइकिल सवारों ने कहा कि रात के समय ऐसे वाहनों को रोककर इसकी शिकायत करने पर उल्टा डांट सुननी पड़ती है।
-बोले जिम्मेदार-
हम लोग लगातार वाहनों की जांच कर रहे हैं। तेज लाइट वाला वाहन मिलता है तो उसे जब्त कर कार्रवाई के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी के पास भेज दिया जाएगा। सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
- प्रकाश कुमार, यातायात डीएसपी

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