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्प्रिरंकलर पोर्टेबल व ड्रिप इरीगेशन पर अनुदान दे रही सरकार

लहेरियासराय। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर ड्रॉप मोर क्रॉप- माइक्रो इरिगेशन योजना के तहत...

्प्रिरंकलर पोर्टेबल व ड्रिप इरीगेशन पर अनुदान दे रही सरकार
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हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाTue, 18 Jun 2024 01:45 AM
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लहेरियासराय। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर ड्रॉप मोर क्रॉप- माइक्रो इरिगेशन योजना के तहत उद्यान विभाग किसानों को ्प्रिरंकलर पोर्टेबल व ड्रिप इरीगेशन पर अनुदान दे रहा है। इस वर्ष जिले को 171 एकड़ में इस योजना के तहत खेती करने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए अभी तक 156 एकड़ में खेती के लिए किसानों ने आवेदन किया है। इस योजना में किसानों को 80 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। इस योजना से फसल में लगने वाले पानी की खपत भी कम होगी और पौधे को पर्याप्त मात्रा में पानी भी मिल जाएगा। जिले के किसानों को अब खेतों में सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत किसानों को माइक्रो इरिगेशन विधि से खेतों में लगे फसलों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचेगी। इसको लेकर जिला उद्यान विभाग किसानों को जागरूक करने में लगा हुआ है। सहायक निदेशक उद्यान नीरज कुमार झा ने बताया कि इस स्कीम में आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। माइक्रो इरिगेशन दो तरह से काम करता है। पहले ड्रिप यानी टपक विधि और दूसरा मिनी ्प्रिरंकल यानी फब्बारा विधि है। ड्रिप विधि के प्रयोग के लिए किसानों को तैयार खेत में पहले पाइप बिछाना पड़ता है। इसके साथ ही पौधे पर पानी की बूंदे टपकती रहती है जबकि फसल के ऊपर से फव्वारे से पानी गिरता रहता है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसानों की आय दोगुनी करने में भी यह योजना लाभकारी साबित हो रही है। सहायक निदेशक उद्यान नीरज कुमार झा ने बताया कि पानी की कमी से जूझते किसानों को कृषि लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और ्प्रिरंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पानी की तो बचत होती ही है, सिंचाई का भी खर्चा कम हो जाता है। फलस्वरूप किसानों का लाभ बढ़ जाता है।

पंपसेट से 30 प्रतिशत पानी होता है बर्बाद

पंपसेट से सिंचाई करने पर करीब 30 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। पिछले कुछ वर्षों से भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसे बचाने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है। यही वजह है कि किसानों को हर संभव कोशिश कर चल संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। 80 प्रतिशत खेती बारिश के भरोसे होती है। कहीं ज्यादा बारिश तो कहीं सूखे की वजह से हर साल किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा हर जगह नदी नहर की भी सुविधा नहीं होने की वजह से किसानों को डीजल पंप सेट से सिंचाई करनी पड़ती है।

खाद की बचत के साथ पैदावार में भी बढ़त

पाइप में जगह-जगह पर छेद कर दिया जाता है। छेद के माध्यम से फसल के जड़ों में पानी जाता है। इस विधि से पटवन करने पर 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। किसान खाद और दवाई भी डाल सकते हैं। इससे पोषक तत्व की बर्बादी कम होती है जिससे खाद की भी बचत होती है। साथ ही पैदावार में भी बढ़त होती है। वहीं मिनी ्प्रिरंकल विधि के तहत खेत के बीच में पाइप बिछाकर झरना लगा दिया जाता है। झरना खेत के चारों तरफ घूम-घूमकर पानी का छिड़काव करता है। यानी जितनी पानी की जरूरत होती है उतना पानी मिलता रहता है। ड्रिप सिंचाई विधि से केला, सब्जी, नींबू अमरूद आदि की भी खेती कर सकते हैं।

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