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दरभंगा लक्षण दिखने पर शुरू में ही कराएं इलाज : अधीक्षक

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:20 AM


लक्षण दिखने पर शुरू में ही कराएं इलाज : अधीक्षक

दरभंगा | डीएमसीएच में मधुबनी के चार बच्चों की मौत होने पर सोमवार को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. मणिभूषण शर्मा ने कहा कि जिन चार बच्चों की मौत हुई है, वे मधुबनी जिले के थे। उनमें से तीन एक ही परिवार के थे। वे तीनों 28 मई को एक साथ भर्ती किए गए थे। अधीक्षक ने कहा कि तीनों को एनीमिया (ब्लड की कमी) था। वे निमोनिया से ग्रसित थे तथा तीनों को बुखार भी था। उन तीनों के शरीर में खून की काफी कमी थी, जिसके कारण उनका पूरा शरीर फुल गया था। उन्हें काफी सीरियस स्टेज में उनके परिजन डीएमसीएच लेकर आए थे। उन तीनों में से एक की मौत 29 मई को सुबह 4:30 बजे दूसरे की मौत उसी दिन रात 10:25 बजे तथा तीसरे बच्चे की मौत 30 मई को दोपहर 2:30 बजे हुई। चौथे बच्चे को एक साल पहले से मैनेनजाइटिस था तथा उसके माथे पर वीपी शंट लगा हुआ था। उसमें खून की काफी कमी थी एवं वह एक साल से गंभीर रूप से बीमार था। उसका इलाज दरभंगा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। वह पोस्ट मेनिनजाइटिस हाइड्रोकैफेलस से ग्रसित था। उसका न्यूरोलॉजिकल इलाज के लिए पटना ले जाया गया। वहां न्यूरो सर्जन उसका इलाज कर रहे थे। इलाज के दौरान ही उसकी आरटीपीसीआर जांच करायी गयी था, जिसमें वह पॉजिटिव निकला था। उसकी बीमारी की स्थिति के अनुसार उस बच्चे को एम्स, पटना रेफर किया जाना था, लेकिन टेक्निकल वेंटिलेटर पर उसे डीएमसीएच लाया गया। डीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. केएन मिश्रा की निगरानी में उसे आईसीयू में रखा गया। वहां उसकी गहन चिकित्सा की गई। चूंकि वह एक साल से गंभीर एवं जटिल बीमारी से ग्रसित था और उसके शरीर में खून की काफी कमी थी। उसके परिजन चारों तरफ से निराश होने के बाद उसे डीएमसीएच लाये थे। डीएमसीएच में चिकित्सकों ने उस बच्चे को बचाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। चौथे बच्चे को 30 मई की सुबह छह बजे भर्ती किया गया था तथा 30 मई को ही शाम 4:30 बजे उसकी मृत्यु हो गई। अधीक्षक ने कहा कि इन चारों मामलों के अध्ययन से यही पता चलता है कि अभी भी लोगों में शिक्षा एवं जागरूकता की काफी कमी है। यदि प्रारंभ में ही इन बच्चों का सही इलाज हो जाता है तो ऐसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं होती। मधुबनी के इन चारों बच्चों में से तीन कोरोना निगेटिव थे और चौथा पटना की जांच रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव आया था। इन चारों बच्चों के इलाज में डीएमसीएच की ओर से भरपूर प्रयास किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। चारों बच्चों में खून की काफी कमी थी और चारों गंभीर एवं जटिल बीमारी से ग्रसित थे।

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