
सोने-चांदी के बाद मिट्टी के सामान की भी जमकर हुई खरीदारी
संक्षेप: सिंहवाड़ा में धनतेरस पर सोने-चांदी के व्यापारियों के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारोबारियों की भीड़ देखी गई। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और मिट्टी के दीयों की बिक्री में तेजी आई है। दुकानदारों ने...
सिंहवाड़ा। धनतेरस के मौके पर सोने-चांदी के कारोबारी ग्राहकों की सेवा में व्यस्त रहे। उससे ज्यादा व्यस्तता रविवार को मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारोबारियों के बीच देखी गई। लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति, मिट्टी के गुल्लक, दीए खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। इसके साथ ही किराना व्यवसायी एवं जनरल स्टोर के संचालक भी बड़ी संख्या में आए ग्राहकों की सेवा कर गदगद हो गए। भरवाड़ा, सिंहवाड़ा, सिमरी आदि बाजारों में दीपावली की खरीदारी के लिए लोग उमड़ पड़े। साग, सब्जी, पनीर, मिठाई, फल आदि खरीदने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक देखी गई। बच्चन पंडित, सुरेश पंडित, मोहन पंडित आदि दुकानदारों ने बताया कि मिट्टी के दीए फिर से तेजी से बिकने लगे हैं।

इससे लग रहा है कि सनातन संस्कृति पुनर्जीवित हो रही है। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति खरीदने वालों की भी संख्या तेजी से बढ़ी है। गुड्डू कुमार, सतीश साह आदि किराना व्यवसायियों ने बताया कि छोटे-छोटे बल्ब वाली चाइनीज झाड़ी की बिक्री घाटी है। वहीं, मिट्टी के दीए में तेल डालने के लिए तिल, सरसों एवं तीसी के तेल अधिक बिके हैं। सेवानिवृत्त फौजी दिनेश ठाकुर, शिक्षाविद निर्भय कुमार, पर्यावरणविद संजय कुमार आदि ने बताया कि मिट्टी के दीए जलाकर पर्यावरण को बचाने का मुहिम सनातन संस्कृति की देन है जो फिर से तेजी से बढ़ने लगी है। रात में सोने से पहले लोगों ने यम का दीप घर से बाहर निकाला। दीप का मुंह दक्षिण दिशा की ओर कर यमराज की स्तुति की। पंडित सह कथावाचक रामपुरा निवासी सुनील मिश्रा ने बताया कि छोटी दिवाली के मौके पर यम का दीप निकालने की परंपरा हमारी संस्कृति में बहुत पहले से है। उर्मिला देवी, मनोरमा देवी, शकुंतला देवी, जूली कुमारी आदि ने बताया कि यम का दीप निकालकर परिवार, समाज एवं राष्ट्र को बुरी नजरों से बचने के लिए प्रार्थना की जाती है।

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