
बुजुर्गों को दोहरी पीड़ा दे रही जीवन प्रमाणीकरण के आवोदन की प्रक्रिया
वृद्धावस्था पेंशन के लिए जीवन प्रमाणीकरण की नई आवेदन प्रक्रिया ने बुजुर्गों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। ठंड के मौसम में उन्हें बार-बार साइबर कैफे जाना पड़ रहा है, जहां मनमाने शुल्क वसूले जा रहे हैं। लोग सरकार से वार्ड स्तर पर आवेदन केंद्र खोलने की मांग कर रहे हैं, ताकि बुजुर्गों को राहत मिल सके।
वृद्धावस्था पेंशन के लिए जीवन प्रमाणीकरण के लिए अब नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया का निर्देश दिया गया है। इससे बुजुर्गों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कड़ाके की ठंड के बीच वृद्धजनों को पेंशन जीवन प्रमाणीकरण के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है। जानकारी के अभाव में कई बुजुर्गों को साइबर कैफे में भी जाते हुए देखा जा रहा है। यह स्थिति न केवल उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कष्टदायक साबित हो रही है, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। साइबर कैफे संचालकों द्वारा मनमानी राशि वसूले जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
लोग वार्ड स्तर पर इसकी व्यवस्था करने की सरकार से मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से वृद्धावस्था पेंशन के लिए जीवन प्रमाणीकरण के लिए नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू किए जाने के बाद जिले के बुजुर्गों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कड़ाके की ठंड के बीच वृद्धजनों को पेंशन जीवन प्रमाणीकरण के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है। जानकारी के अभाव में कई बुजुर्गों को साइबर कैफे में भी जाते हुए देखा जा रहा है। यह स्थिति न केवल उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कष्टदायक साबित हो रही है, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। साइबर कैफे संचालकों द्वारा मनमानी राशि वसूले जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। शहर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले वृद्धजनों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही पेंशन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की हो, लेकिन जीवन प्रमाणीकरण प्रक्रिया को जिस तरह ऑनलाइन बनाया गया है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। खासकर इस भीषण ठंड में जब सामान्य लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है, ऐसे में कमजोर शरीर वाले बुजुर्गों से बार-बार बाहर निकलकर आवेदन कराने की अपेक्षा करना अमानवीय प्रतीत होता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक जीवन प्रमाणीकरण आवेदन को पूरा करने के लिए कई बार साइबर कैफे जाना पड़ता है। कभी दस्तावेज में त्रुटि बताई जाती है, तो कभी सर्वर डाउन होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। इस दौरान प्रत्येक बार साइबर कैफे संचालक आवेदन के नाम पर 100 से 300 रुपये तक वसूल रहे हैं। गरीब और जरूरतमंद वृद्धजनों के लिए यह राशि भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि पेंशन के लिए आवेदन करने वाले अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूरी या दूसरों पर निर्भर जीवन जी रहे हैं। वृद्धजनों का कहना है कि ठंड के मौसम में उन्हें पहले से ही जोड़ों के दर्द, सांस की तकलीफ, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सुबह-सुबह या देर शाम साइबर कैफे जाने के दौरान ठंडी हवा लगने से उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ जाती है। कई मामलों में बुजुर्ग बीमार पड़ गए हैं, जिससे उन्हें दवा और इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इस तरह पेंशन पाने की उम्मीद में वे अपनी सेहत और जेब दोनों से हाथ धो बैठ रहे हैं। शहर के कई मोहल्लों के लोगों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि वृद्धा पेंशन आवेदन के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे बुजुर्गों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि प्रत्येक वार्ड में आवेदन केंद्र खोले जाने चाहिए, जहां प्रशिक्षित कर्मी बुजुर्गों के आवेदन भरने में मदद कर सकें। इससे न केवल साइबर कैफे की मनमानी पर लगाम लगेगी, बल्कि जरूरतमंदों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर निगम को इस दिशा में पहल करते हुए वार्ड स्तर पर आवेदन की व्यवस्था करनी चाहिए। निगम के पास संसाधन और कर्मचारी हैं, जिनके माध्यम से अस्थायी कैंप या सुविधा केंद्र लगाए जा सकते हैं। यदि नगर निगम और समाज कल्याण विभाग मिलकर इस दिशा में काम करें, तो हजारों बुजुर्गों को राहत मिल सकती है।

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