
बाजार में चीनी उत्पादों की बाढ़ से छिन रहा कुम्हारों का पारंपरिक रोजगार
दरभंगा के मौलागंज और हसनचक दुर्गा मंदिर में देवी सरस्वती की मूर्तियों का निर्माण शुरू हो चुका है। हालांकि, कुम्हारों के बाजार से खरीदारों की कमी है। मिट्टी के बर्तन और अन्य उत्पादों की बिक्री में कमी आई है, जिससे आर्थिक मुश्किलें बढ़ रही हैं। टेराकोटा सामान्य सुविधा केंद्र भी बंद पड़ा है।
दरभंगा शहर के मौलागंज व हसनचक दुर्गा मंदिर कुम्हार बाजार में देवी सरस्वती की मूर्तियां बननी शुरू हो चुकी हैं। कुंभकारों के परिवार के सदस्य मिट्टी गूंथने, पराली से ढांचा बनाने, सांचा फिटिंग आदि कार्य में जुट गए हैं। हालांकि, कुम्हारों के बाजार से खरीदारों की रौनक गायब है। फिलहाल मूर्तियों की उम्मीद के अनुसार बुकिंग नहीं हो रही है। मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, चूल्हा-भट्ठी, खिलौना, दीया, मूर्ति आदि की बिक्री भी अब हमेशा नहीं होती है। कई कुम्हार बताते हैं कि सालोंभर बिक्री वाला समय खत्म हुए दशकों बीत गए। पर्व-त्योहारों के भरोसे पुश्तैनी काम चल रहा है। इससे आर्थिक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
शहर के मौलागंज व हसनचक दुर्गा मंदिर कुम्हार बाजार में देवी सरस्वती की मूर्तियों का निर्माण शुरू हो चुका है। कुंभकारों के पारिवारिक सदस्यों की टीम मिट्टी गूंथने, पराली से ढांचा बनाने, सांचा फिटिंग आदि कार्य में जुटी है। कई जगह बड़ों के साथ छोटे बच्चे भी मूर्ति निर्माण में हाथ बंटाते नजर आते हैं। हालांकि कुम्हारों के बाजार से खरीदारों की रौनक गायब है। इसके बावजूद मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, चूल्हा-भट्ठी, खिलौना, दीया, मूर्ति आदि की बिक्री की बुझी आस संजोए हुए हैं। कुम्हार बताते हैं कि सालोंभर बिक्री वाला माहौल खत्म हुए दशकों बीत गए। पर्व-त्योहारों के भरोसे पुश्तैनी कारोबार चल रहा है। इससे आर्थिक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मंगनू पंडित, शंकर पंडित, गणेश पंडित, चंदेश्वर पंडित, सुशील पंडित, अंशु कुमार, मोहन कुमार, चुनचुन देवी, शंभू कुमार पंडित, झमेली पंडित आदि बताते हैं कि पुश्तैनी धंधा दोहरी समस्या से जूझ रहा है। उत्पाद निर्माण के लिए मिट्टी खरीदने में अधिक पैसा खर्च होने से लागत बढ़ी है। वहीं, बाजार में चीन निर्मित दीया, कुल्हड़, मूर्ति, खिलौनों आदि उत्पादों का कब्जा है। उन्होंने बताया कि देसी मिट्टी से बने उत्पादों के खरीदार कम हैं और वाजिब दाम भी नहीं मिलता। इसके चलते कारोबार सिमटता जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुम्हारों द्वारा निर्मित उत्पादों को टेराकोटा शिल्प का दर्जा का मिला हुआ है, इसके बावजूद तकनीकी तौर पर सशक्त बनाने का प्रयास नहीं हो रहा है। इस वजह से परंपरागत कारोबार बाजारू प्रतिस्पर्धा में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। बदलते दौर के अनुरूप कुम्हारों की कला को तराशने का प्रयास होगा तो चायनीज की तरह इंडियन उत्पाद भी वर्ल्ड मार्केट में बिकेगा। वोकल फॉर लोकल जैसी योजनाओं का जमीनी लाभ कुम्हारों को मिले।
टेराकोटा क्लस्टर की बदहाली से मायूस हैं युवा: दरभंगा के वार्ड नंबर 28 स्थित मदारपुर मोहल्ले में जिला उद्योग विभाग की ओर से स्थापित टेराकोटा सामान्य सुविधा केंद्र बंद पड़ा है। कुम्हारों की कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बने केंद्र परिसर में उपकरण धूल फांक रहे हैं और कूड़ा-कचरा पसरा है। टेराकोटा क्लस्टर केंद्र की बदहाल तस्वीर शिल्पी विकास योजनाओं की पोल खोल रही है। टेराकोटा शिल्पियों की मानें तो यह सुविधा केंद्र एक दिन भी नहीं चला। शंभु कुमार पंडित, सुशीला देवी, मनोज कुमार आदि बताते हैं कि लाखों की लागत से टेराकोटा सामान्य सुविधा केंद्र बनाकर सरकार ने अच्छी पहल की थी। इसके माध्यम से टेराकोटा शिल्पियों को रोजगार देने का बंदोबस्त किया गया। एक जगह बैठकर कार्य करने के लिए इलेक्ट्रिक चाक, मिट्टी मिलाने के लिए पिकमैन मशीन, टेराकोटा उत्पाद को पकाने के लिए भट्ठी आदि सुविधाएं मौजूद हैं, फिर भी विभाग स्थानीय शिल्पियों की समिति बनाकर इसे संचालित नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि कलस्टर केंद्र को चालू करने की बातें कई बार अधिकारियों ने की पर शुरुआत नहीं हुई। इस वजह से टेराकोटा शिल्पी आर्थिक दुश्वारियों का सामना कर रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
उद्यमियों के लिए कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। व्यवसाय के लिए बैंक लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- नवल किशोर पासवान, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग।
पुश्तैनी पेशे से जुड़े उद्यमियों को आधुनिक बाजार में चुनौती का सामना करना पड़ता है। खादी ग्रामोद्योग परंपरागत व्यवसाय को बढ़ावा देने का लगातार प्रयास कर रहा है। समय-समय प्रशिक्षण व प्रदर्शनी में बिक्री का अवसर शिल्पियों को उपलब्ध कराया जाता है।
-रिजवान अहमद, जिला खादी ग्रामोद्योग पदाधिकारी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




