
सिद्धांत सिद्ध होने पर बन जाते विज्ञान :
डॉ. सुनील कुमार सिंह ने एक दिवसीय संगोष्ठी में कार्ल सैगन के खगोलशास्त्र में योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हम तारों से बने हैं और हमारे डीएनए में नाइट्रोजन, कैल्शियम और आयरन शामिल हैं। डॉ. मनुराज शर्मा ने भारतीय खगोलवेत्ताओं के योगदान की सराहना की और सैगन की पुस्तक 'कॉस्मॉस' का उल्लेख किया।
डॉ. सुनीलदरभंगा। प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या करने वाले संभावित विचार ही सिद्धांत में परिणित होते हैं। जब सिद्धांत सिद्ध हो जाता है तो वह विज्ञान में बदल जाता है। लनामिवि के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कुमार सिंह ने उक्त बातें कही। खगोलशास्त्र में कार्ल सैगन का योगदान विषयक संगोष्ठी में डॉ. सिंह ने कहा कि हम तारों से बने हैं। हम ब्रह्मांड के लिए स्वयं को जानने का एक माध्यम हैं। हमारे डीएनए में नाइट्रोजन, हमारे दांतों में कैल्शियम, हमारे खून में आयरन, ये सब टूटते तारों के अंदरूनी हिस्सों में बने हैं, जो आज भी हमारे शरीर मे विद्यमान है।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. मनुराज शर्मा ने कहा कि कार्ल सैगन ने ब्रह्मांड के कई गुत्थियों को सुलझाने का काम किया है। सैगन ने अपनी पुस्तक कॉस्मॉस में जगह-जगह भारतीय खगोलवेत्ता के बारे बतलाया है। खगोल या ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने में भारतीय खगोल वेत्ताओं का अतुलनीय योगदान है। पुस्तक में बिलियन शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया है, जो ब्रह्मांड के विशाल पैमाने को एक सहज तरीके से व्यक्त करने की उनकी क्षमता का प्रतीक बन गया है। हिंदू खगोल विज्ञान, हिंदू पौराणिक कथाओं और हिंदू आध्यात्मिक विज्ञान में कई सिद्धांत हैं जो वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विचार-आहार प्रदान कर सकते हैं। हिंदू धर्म विचारों और कल्पनाओं से समृद्ध है जो वैज्ञानिक खोजों और आविष्कारों को जन्म दे सकते हैं। डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत डॉ. रश्मि शिखा ने तथा धन्यबाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। संगोष्ठी में सुरभि कुमारी, नंदन कुमार सत्यम आदि उपस्थित थे।

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