कटहलबाड़ी के तालाब में बहाए जा रहे नाले, कचरे के दुर्गंध से जीना हुआ मुहाल

Feb 27, 2026 12:19 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा, जिसे तालाबों के शहर के रूप में जाना जाता है, अब तालाबों के विलुप्त होने की कगार पर है। कटहलबाड़ी का प्राचीन तालाब अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण संकट में है। स्थानीय लोग इसकी दुर्दशा के बारे में चिंतित हैं, क्योंकि तालाब का जल प्रदूषित हो चुका है और आसपास रहने वाले परिवारों का जीवन दूभर हो गया है।

कटहलबाड़ी के तालाब में बहाए जा रहे नाले, कचरे  के दुर्गंध से जीना हुआ मुहाल

तालाबों के शहर के रूप में प्रसिद्ध दरभंगा की पहचान अब धीरे-धीरे धुंधली पड़ती जा रही है। मिथिला की संस्कृति और भूगोल में तालाबों का स्थान सर्वोपरि रहा है, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ और प्रशासनिक उदासीनता ने इन जलस्रोतों को खत्म करने के कगार पर खड़ा कर दिया है। वर्तमान में शहर के वार्ड-13 स्थित कटहलबाड़ी का प्राचीन तालाब इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है। जो तालाब कभी मोहल्ले की रौनक और जीवनरेखा हुआ करता था, वह आज अतिक्रमण, गंदगी और सरकारी उपेक्षा के कारण अपना अस्तिव खो रहा है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि तालाब की दुर्दशा अब इतनी बढ़ गई है कि आसपास रहने वाले परिवारों का जीवन दूभर हो गया है।

कटहलबाड़ी के बुजुर्गों का कहना है कि एक समय यह तालाब मोहल्ले की जीवनरेखा हुआ करता था। लोग यहां स्नान करते थे, छठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान होते थे और गर्मी के दिनों में तालाब का पानी आसपास के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। तालाब के चारों ओर अतिक्रमण बढ़ गया है और उसके भीतर लगातार कचरा फेंका जा रहा है। सबसे गंभीर समस्या यह है कि मोहल्ले के गंदे नाले का पानी सीधे तालाब में गिराया जा रहा है। इससे तालाब का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और वहां से तेज दुर्गंध उठती रहती है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि गर्मी और बरसात के दिनों में बदबू इतनी बढ़ जाती है कि घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है, जिससे बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। ‘तालाब बचाओ अभियान’ के संयोजक नारायण जी चौधरी ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि शहर के कई तालाबों की तरह कटहलबाड़ी का यह तालाब भी अतिक्रमण और गंदगी की वजह से अपना अस्तित्व खो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में ही उन्होंने जिला प्रशासन को तालाब की खराब स्थिति से अवगत कराते हुए इसके संरक्षण की मांग की थी। नारायण जी चौधरी के अनुसार, प्रशासन को लिखित रूप से सूचना देने और कई बार गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न तो तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और न ही इसमें कचरा डंप करने पर प्रभावी रोक लगाई गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ वर्षों में तालाब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाबों को बचाने के लिए कागजों पर योजनाएं बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता। लोगों का कहना है कि शहर के पुराने जलस्रोतों को बचाना केवल पर्यावरण का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी सवाल है। कटहलबाड़ी के निवासियों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर तालाब के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की मांग की है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी तालाब केवल जल संग्रहण का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे भूजल स्तर बनाए रखने, तापमान नियंत्रित करने और जैव विविधता को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिकायतें: 1. संरक्षण और देखभाल के अभाव में शहर में तालाबों का तेजी से विलुप्त होना जारी है। इस पर रोक नहीं लग रही है। 2. तालाबों पर अतिक्रमण और गंदगी का बढ़ना लगातार जारी है। इसे रोकने की दिशा में आवश्यक पहल नहीं की जा रही है। 3. गंदे नाले का पानी कटहलबाड़ी के तालाब में गिराया जा रहा है और इसकी रोकथाम की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। 4. तालाब में कचरा गिराने से निकलने वाली दुर्गंध और गंदगी के कारण स्थानीय लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। सुझाव: 1. तालाबों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन को विशेष कदम उठाने चाहिए। इस दिशा में आवश्यक पहल होनी चाहिए। 2. अतिक्रमण हटाने और गंदगी रोकने के लिए नियमित निगरानी की जानी चाहिए। संबंधित अधिकारी इसके लिए पहल करें। 3. गंदे नाले का पानी तालाब में गिरने से रोकने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। इसकी निगरानी भी होनी चाहिए। 4. तालाब के आसपास स्वच्छता और हरियाली बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए।

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