Hindi NewsBihar NewsDarbhanga NewsChhath Festival Celebrations at Historic Dighi Pond in Gonoo Village
दिग्घी पोखर पर लगता है सूर्यदेव का दरबार

दिग्घी पोखर पर लगता है सूर्यदेव का दरबार

संक्षेप: सिंहवाड़ा के गोनू ग्राम नगर पंचायत भरवाड़ा में ऐतिहासिक दिग्घी पोखर के किनारे छठ पर्व पर श्रद्धालु सूर्यदेव का दरबार सजाते हैं। श्रद्धालु दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं और रातभर सूर्य देव का इंतजार...

Mon, 27 Oct 2025 11:20 AMNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
share Share
Follow Us on

सिंहवाड़ा। गोनू ग्राम नगर पंचायत भरवाड़ा स्थित ऐतिहासिक दिग्घी पोखर किनारे छठ के मौके पर सूर्यदेव का दरबार सजता है। यहां लोग मन्नत मांगने दूर-दूर से पहुंचते हैं। इस बड़े तालाब के चारों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ करने के लिए पहुंचते हैं। तालाब किनारे संध्या अर्घ्य लेकर पहुंचे श्रद्धालु सुबह तक भगवान सूर्य का इंतजार करते हैं। तालाब के सभी भागों में कहीं भजन व कहीं सत्संग की अविरल धारा बहती रहती है। मनोरंजन के भी एक पर एक साधन मौजूद रहते हैं। सूर्यदेव के दरबार में बनी सूर्यदेव की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि वाकपटुता के धनी गोनू झा के समय में भी छठ पर्व के मौके पर रातभर सूर्यदेव के इंतजार की बात बताई जाती है।

यही कारण है कि उनके इस गांव में आज तक इस चलन को लोग कर रहे हैं। रातभर जाग रहे श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह नि:शुल्क चाय-पानी की व्यवस्था के लिए स्टॉल लगे रहते हैं। स्वर्णकार संघ के शंभू ठाकुर, पंकज ठाकुर, ग्रामीण अर्जुन यादव, महादेव साह, नंदू साह, गुड्डू गुप्ता, मिथलेश साह, दिगंबर ठाकुर आदि ने बताया कि दिग्घी पोखर किनारे लगे सूर्यदेव के दरबार में मांगी गई मन्नत पूरी होती है। यही कारण है कि लोग यहां छठ देखने के साथ-साथ मन्नत मांगने पहुंचते हैं। मिट्टी के चूल्हे पर बनाया प्रसाद बिरौल। प्रखंड क्षेत्र में लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर लोगों की अपनी संस्कृति तथा धर्म के प्रति आस्था व विश्वास की भावनाएं चरम पर हैं। पूजा के दूसरे दिन रविवार को व्रतियों ने दिनभर उपवास रखकर देर शाम खरना का प्रसाद ग्रहण कर निर्जला उपवास शुरू कर दिया है। इस दौरान छठ व्रतियों ने गेहूं एवं चावल को अपने घरों में पीसकर आटा तैयार किया। पवित्र नदियों तथा तालाबों में स्नान कर दिनभर उपवास रखा। घर-आंगन को गाय के गोबर तथा चिकनी मिट्टी से लीपकर गंगाजल छिड़ककर पवित्र बनाया। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से पीतल के बर्तन में खीर पकाकर भगवान भास्कर को भोग लगाकर परिजनों व लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया। लोगों ने छठ व्रतियों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।