पारंपरिक रूप से मना जूड़-शीतल का पर्व

Newswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा में जूड़-शीतल पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सनातन धर्मावलंबियों ने मृत पितरों के लिए जलपूर्ण घट दान किया। बुजुर्ग महिलाओं ने छोटे सदस्यों पर शीतल जल डालकर आशीर्वाद दिया। इस पर्व का उद्देश्य संतुलन, शीतलता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

पारंपरिक रूप से मना जूड़-शीतल का पर्व

दरभंगा/मनीगाछी। नव वर्ष के शुभारंभ जूड़-शीतल पर सनातन धर्मावलंबियों ने जीवात्मा व अपने मृत पितरों के निमित्त जलपूर्ण घट दान किया। इस अवसर पर बुधवार की सुबह घर की बुजुर्ग महिलाओं ने अपने से छोटों के सिर पर शीतल जल डालकर जुड़ायल रहू का आशीर्वाद दिया। इस दिन लोगों ने एक दिन पूर्व मंगलवार को बनाया गया बड़ी-भात का भोजन किया। मिथिला में सदियों पुरानी यह परंपरा अब भी कायम है। शास्त्रों के अनुसार, सौर, सावन, नाक्षत्र एवं चांद्र मासों के अनुसार प्रक्रियागत चार प्रकार के वर्षों में सौर मास की प्रधानता खगोलविदों ने निर्धारित की है। यह राशि गत मेष राशि से आरंभ होकर मीन राशि में 12 मास की अवधि पूरी कर वर्ष की गणना में संपन्न होती है।

मेष राशि का आरंभ वैशाख मास में होता है। इसके 30 दिनों तक जल दान करने की परंपरा आदि काल से चली आ रही है। वैशाख मास को माधव मास की संज्ञा से भी अभिहित किया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार ‘न माधव समो मासो न कृतेन युगं समन च वेद समं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम।’ इस मास को सभी मासों में श्रेष्ठ मानते हुए इसे माधव अर्थात भगवान विष्णु के नाम से भी अभिहित किया गया है।देवी भागवत के अनुसार माघ मास में अग्नि दान एवं वैशाख मास में जलदान के अनंत पुण्य की कथा वर्णित है। हमारे पूर्व ऋषियों ने स्थावर जंगम सहित सभी जीवात्माओं के साथ ही मृतात्माओं की तृप्ति के एकमात्र साधन के रूप में जल को मानते हुए उन्होंने वर्ष के आरंभ से मास दिन पर्यंत जलदान करने की परंपरा स्थापित की है। इसी परंपरा में इस मेष राशि की संक्रांति पर्व पर अपने मृत माता-पिता के उद्देश्य से उपकरणों सहित जलपूर्ण घट दान करने एवं मास पर्यन्त आम जनों को जल दान करने की परंपरा है। इसके साथ ही स्थावर जीवों में तुलसी के वृक्ष को सर्वोत्कृष्ट मानते हुए मास पर्यन्त प्रपा अर्थात पनिशाला द्वारा तृप्त किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार माधवं सकलं मासं तुलस्या योऽर्चयेन्नर:। त्रिसंध्य मघहंतारं नास्ति तस्य पुनर्वास:। स्कंद पुराण के अनुसार सभी दानों में वैशाख मास में जल दान को सर्वाधिक प्रमुख माना गया है। इन्हीं धार्मिक परंपराओं के महत्व को अंगीकार करते हुए सनातन धर्मावलंबियों में इस राशि को घट दान की परंपरा आदि काल से चली आ रही है।तारडीह : प्रखण्ड में जूड़-शीतल पर्व बुधवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतिक लोक पर्व जूड़-शीतल घर-घर में धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व जीवन में संतुलन, शीतलता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। इस पर्व के अवसर पर लोगों ने बासी व शीतल भोजन ग्रहण किया और छायादार व औषधीय वृक्षों को जल अर्पित कर प्रकृति के प्रति आस्था प्रकट की। घर के बड़े- बुजुर्गो ने छोटे सदस्यों के सिर पर ठंडा जल डालकर उन्हें जुड़ाए रहने यानी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।

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