ललित की रचनाओं में मार्क्स व फ्रायड का समन्वय: प्रो. अरुण

Apr 07, 2026 02:00 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा में लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग में प्रख्यात साहित्यकार ललित की 95वीं जयंती मनाई गई। प्रो. अरुण कुमार कर्ण ने उनके साहित्य को प्रेरणादायक बताया। ललित ने मिथिला के ग्रामीण जीवन का जीवंत चित्रण किया और आधुनिक मैथिली कथा साहित्य को समृद्ध किया। विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी गई।

ललित की रचनाओं में मार्क्स व फ्रायड का समन्वय: प्रो. अरुण

दरभंगा। लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग में सोमवार को प्रख्यात मैथिली साहित्यकार एवं कथाकार ललित की 95वीं जयंती प्रो. अरुण कुमार कर्ण की अध्यक्षता में मनाई गई। इस अवसर पर प्रो. कर्ण ने कहा कि ललित साहित्य के ऐसे कलाकार थे, जिनकी रचनाएं हमेशा याद की जाएंगी। उनकी रचना में मार्क्स और फ्रायड दोनों का समन्वय स्थापित है। ललित ने मिथिला के ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ का जो सजीव चित्रण अपनी रचनाओं में किया है, वह आज के शोधार्थियों और युवा लेखकों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत है। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा ने कहा कि राजमोहन झा ने मैथिली साहित्य के सिद्धहस्त कथाकार ललित के कथा साहित्य को आधुनिक कथा की श्रेणी में रखा है।

इन्हीं से मैथिली कथा साहित्य अपने ऊंचाई को प्राप्त कर सकी। मैथिली कथा-उपन्यास साहित्य को दिशा दिखाने वाले ललित ही हैं। इन्ही से प्रेरित होकर राजकमल चौधरी और मायानन्द मिश्र मैथिली साहित्य की तरफ उन्मुख हुए और मॉडल स्टोन बन गए।प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि भविष्य में ललित की शताब्दी वर्ष मनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने उनके कथा उपन्यास साहित्य की बारीकीयों से सब को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इनके कथा उपन्यास पढ़ कर कोई मैथिली की मूलभूत अवश्यकता से परिचित हो सकता है, और आगे का रास्ता भी इन्होंने बखूबी दिखाया है।डॉ. अभिलाषा कुमारी ने कहा ललित साहित्य एक बार में समझ लेने की चीज नहीं है। समझने पर उसमें बार-बार डुबकी लगाने की इच्छा जागृत होती है। डॉ. सुरेश पासवान ने कहा कि ललित अपने रचना में महिला पात्रों को आवश्यकता के रूप में प्रयोग किये, ना कि उपभोग के रूप में। शोधार्थियों ने ललित के कथा-शिल्प, उनकी भाषा-शैली और उनके पात्रों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर अपने शोधपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक मैथिली कथा-साहित्य को समृद्ध करने और उसे एक नई दिशा देने में ललित का योगदान अविस्मरणीय है। छात्र-छात्राओं ने भी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनके साहित्य की प्रासंगिकता पर परिचर्चा की। डॉ. सुनीता कुमारी के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन राजनाथ पंडित ने किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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