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दरभंगा

सरकारी उपेक्षा का शिकार है गंगेश्वरस्थान स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 06:01 PM
सरकारी उपेक्षा का शिकार है गंगेश्वरस्थान स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल

जाले | एक संवाददाता

दरभंगा जिला के पश्चिमोत्तर इलाके के साथ-साथ सीमावर्ती सीतामढ़ी, मधुबनी और मुजफ्फरपुर जिला के दर्जनों गांव के लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ दिलवाने के लिए अंग्रेज के शासनकाल में रतनपुर गांव के गंगेश्वर सथान में कटाई आयुर्वेदिक औषधालय की स्थापना की गई थी। अंग्रेज के शासनकाल में भी यहां सरकारी स्तर पर आयुर्वेदिक बैद्य बैठते थे। वे इलाके के लोगों का आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करते थे। आजादी के बाद सरकार के दिशानिर्देश पर डिस्ट्रिक बोर्ड की ओर से इस अस्पताल का संचालन होने लगा। अस्पताल में बैद्य, कंपाउंडर और एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की पदस्थापना भी होने लगी। इस आयुर्वेदिक अस्पताल के माध्यम से इलाके की बहुत बड़ी आबादी को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ मिल रहा था। अस्पताल को समुचित मात्रा में आयुर्वेदिक दवाइयों की भी आपूर्ति की जाती थी। बैद्य बीमार लोगों का दवा के बल पर सफल इलाज भी किया करते थे। ग्रामीण बताते हैं कि अस्सी के दशक तक यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा की स्थिति अच्छी थी। नब्बे के दशक से इस अस्पताल की उपेक्षा होने लगी। धीरे धीरे अस्पताल को दवाई की आपूर्ति बंद कर दी गई। लगभग तीस पैंतीस वर्षों से यह अस्पताल बिना दवाई के चल रहा था। अस्पताल में सिर्फ एक बैद्य की पदस्थापना कर अस्पताल के संचालन की औपचारिकताएं निभाई जाती रही। वह बैद्य भी 31 मार्च को रिटायर्ड हो गए हैं। अब इस आयुर्वेदिक अस्पताल को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे हालात में अब धीरे धीरे इस अस्पताल का अतिक्रमण होता हुआ दिख रहा है। अगर विभागीय स्तर पर इस प्राचीन आयुर्वेदिक अस्पताल की सुधि नहीं ली गई तो निश्चित तौर पर आयुर्वेदिक अस्पताल का वजूद खतरे में पड़ जाएगा। गौरतलब है कि जहां इक्कीसवीं सदी में देश और दुनिया की बहुत बड़ी आबादी आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपनाने के पक्ष में खड़ी है एवं दूसरी ओर जमीन के अभाव में सरकार अस्पतालों का निर्माण नहीं करवा पाती है, ऐसे हालात में पर्याप्त भूमि एवं भवन से लवरेज इस अस्पताल की घोर उपेक्षा कहीं न कहीं हमारे शासन और प्रशासन तंत्र की कमियों को उजागर करता है।

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