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प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से करें परहेज : डॉ. चंद्रेश्वर

दरभंगा। मिथिला कभी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध थी। अनेक प्रकार के...

प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से करें परहेज : डॉ. चंद्रेश्वर
हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाTue, 21 May 2024 07:00 PM
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दरभंगा। मिथिला कभी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध थी। अनेक प्रकार के पक्षी बाग में चहचहाते थे। आम की विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों से हमारी गाछी भरी रहती थी। प्रकृति ने मानव जीवन की सुरक्षा के लिए जैव विविधता का जो कवच हमें दिया था वह आज विकास की दौड़ में छिन्न-भिन्न हो रहा है। लनामिवि के पीजी बॉटनी विभाग में जैव विविधता पर आयोजित व्याख्यान को संबोधित करते हुए अमेरिका के कोलमैन विवि के प्रोफेसर डॉ. चंद्रेश्वर शर्मा ने उक्त बातें कहीं।
पूर्व में स्थानीय सीएम साइंस कॉलेज में बॉटनी के शिक्षक रह चुके डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से यथासंभव परहेज किया जाए। विकास कार्य भी जरूरी है, लेकिन हमें यह देखना होगा कि अगर एक वृक्ष कटता है तो दूसरा पौधा अवश्य लगाएं। पर्यावरण का असंतुलन भावी पीढ़ी के लिए अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सविता वर्मा ने की। मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. एके बच्चन ने कहा कि अपनी ही माटी-पानी में जन्मे और पले वैज्ञानिक हमारे बीच हैं, ऐसे में छात्र- छात्राओं के साथ ही शोधार्थियों को भी प्रो. शर्मा के ज्ञान का लाभ उठाना चाहिए। डॉ. ख्वाजा सलाहुद्दीन के संचालन में आयोजित व्याख्यान में वीर कुंवर सिंह विवि, आरा के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. एनके साहा, सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ. मुरारी प्रसाद, डॉ. गजेन्द्र प्रसाद और डॉ. अंकित कुमार सिंह सहित कई शिक्षक, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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