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एड ऑन कोर्स की स्वीकृति मिलने से छात्र-छात्राओं को मिलेंगे नियोजन के अवसर

लनामिवि के विश्वविद्यालय जंतु विज्ञान विभाग में स्ववित्तपोषित योजनांतर्गत संचालित एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स इन जेरियेटिक केयर के संशोधित अध्यादेश एवं परिनियम को कुलाधिपति की स्वीकृति मिल जाने से छात्रों सहित मिथिला के बुजुर्गों में खुशी है। पहले से तो यह कोर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वित्तपोषण और दिशानिर्देश के तहत चलता रहा था लेकिन पाँच वर्ष की स्वीकृति बीत जाने से इसे स्ववित्तपोषित मोड में तब्दील कर दिया गया।

विवि ने इस कोर्स की लोकप्रियता और नियोजन के अवसर के मद्देनजर इसे और विकसित करने का प्रयास शुरू कर दिया। इसी आलोक में विश्वविद्यालय ने संशोधित अध्यादेश और परिनियम स्वीकृति के लिए कुलाधिपति के पास भेजा था जिसे स्वीकृति मिल गयी है। राजभवन में विशेष कार्य पदाधिकारी (न्यायिक) पीसी चौधरी ने कुलसचिव को पत्र लिखकर कहा है कि विश्वविद्यालय के प्रस्ताव और परामर्शदात्री समिति की अनुशंसा के आलोक में कुलाधिपति ने इसे स्वीकृति प्रदान करने की कृपा की है।

यह कार्यक्रम सर्वप्रथम पाँचवीं पंचवर्षीय योजनांतर्गत यूजीसी द्वारा बहुअनुशासनीय शोध एवं नवाचार योजना के तहत पाँच वर्षों के लिए स्वीकृत किया गया था। ऐसा विभाग के तत्कालीन शिक्षक एवं संस्थान के पहले निदेशक प्रो एम नेहाल के अथक प्रयास से बिहार के एकमात्र विश्वविद्यालय में संभव हो सका था। फिर दूसरे चक्र में यूजीसी और कुलाधिपति ने 14.8.2012 को आगे चलाने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद विभागीय शिक्षक प्रो भवेश्वर सिंह निदेशक नियुक्त किये गये जो अद्यतन इस पद पर बने हैं। इस कोर्स के संचालन के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ जेरांटालॉजी एंड जेरियेटिक केयर की स्थापना हुई। नये संशोधन के बाद अब यह एड आन कोर्स के रूप में चलाया जायेगा।

अब एक वर्षीय स्नातक जेरिटिक केयर का भी कोर्स चलाया जायेगा।इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए कल्याणकारी कार्य भी किये जायेंगे।कोर्स संबधी अध्यादेश में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं में बुजूर्गों के प्रति श्रध्दा व सम्मान पैदा करने, बुजुर्गों को सामाजिक बोझ के बजाय राष्ट्रीय संपदा समझने की प्रवृत्ति विकसित की जायेगी। इस संस्थान से तैयार युवा केन्द्रीय सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट फ एजिंग, देश में स्थापित होने वाले वृध्द सेवाश्रम(ओल्ड एज होम), अस्पताल, पुलिस थाने में खुलने वाले वरीय नागरिक कोषांग सहित मात-पिता, दादा-दादी को सेवा देने का अवसर मिलेगा।

नामांकन को अर्हता: स्नातक प्रतिष्ठा व सामान्य पास तथा न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक वाले छात्र-छात्राओं का नामांकन हो सकेगा। नामांकन के लिए 40 सीटों की स्वीकृति मिली है जिसमें आरक्षण नियमों का अनुपालन करना अनिवार्य होगा।

शुल्क संरचना : कुल 12000 रूपये नामांकन के समय शुल्क के रूप में भुगतान करना होगा। शुल्क का भुगतान सेमेस्टरवार 6000 -6000 रूपये के रूप में किया जायेगा। न्यूनतम 10 सीटों पर नामांकन होने पर.ही कोर्स का संचालन हो सकेगा। शुल्क के विवरण में कहा गया है कि 12000 रूपये में नामांकन शुल्क 1000 रूपये, पंजीयन शुल्क 400 रुपये, ट्यूशन फीस 3600 , लैब शुल्क 1500, पुस्तकालय शुल्क 300, विजली-पानी 200, विकास शुल्क 1500, पहचान पत्र 100, कामन रूम 100, स्टेशनरी एवं साफ्टवेयर 1000, विश्वविद्ययालय परीक्षा शुल्क 1800 रूपये शामिल हैं संशोधित परिनियमानुसार पुराने पीजीडीजीसी कार्यक्रम के लिए अब सिर्फ एक बार परीक्षा होगी।

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  • Web Title:Admissions will be given to the students after getting approval on the add-on