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दरभंगा‘आषाढ़ का एक दिन में आधुनिक समस्या की जीवंत प्रस्तुति

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Mon, 13 Aug 2018 05:40 PM
‘आषाढ़ का एक दिन में आधुनिक समस्या की जीवंत प्रस्तुति

अच्छी कथा वस्तु, अच्छे कलाकार और सधे हुए निर्देशक की क्षमता एकत्र हो जाए तो ऐसे में मंचित होने वाले नाटक दर्शकों को तालियां बजाने को विवश कर ही देते हैं। यह संभव हुआ रविवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर संगीत नाटक विभाग के प्रेक्षागृह में ‘द स्पॉटलाइट थिएटर द्वारा। मोहन राकेश रचित नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन सावन में भी आषाढ़ की अनुभूति करा गया। ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित इस नाटक में आधुनिक समस्याओं को सफलता से पेश किया गया है। 1958 में प्रकाशित यह त्रिखण्डीय नाटक आज भी प्रासंगिक है।

नाटककार ने अपने इस नाटक में कल्पना और मिथ के सहारे जिस कालिदास के चरित्र को गढ़ा है । वे व्रती, तपस्वी, महात्मा या महाकवि नहीं अपितु दुर्बल, आत्मसीमित, ज्ञानशून्य, पलायनवादी एवं अन्तर्द्वन्द्व में फंसे व्यक्ति हैं। इसी दृष्टिकोण से कालिदास के जीवन के उतार- चढ़ाव को इस नाटक के माध्यम से दर्शकों को दिखाने की कोशिश की गई है। मोहन राकेश की इस सोच को ‘द स्पॉटलाइट थिएटर के कलाकारों ने सागर सिंह के कसे हुए निर्देशन में विश्वविद्यालय संगीत नाटक स्नातकोत्तर विभाग के दर्शकों से खचाखच भरे प्रेक्षागृह के रंगमंच पर अपने प्रभावशाली अभिनय क्षमता के दम पर जीवन्त कर दिया। कलाकारों का अभिनय ऐसा था कि लोग वाह-वाह कर उठे।

कालिदास की भूमिका में प्रशान्त राणा व ऋषभ झा, मल्लिका की भूमिका में सुष्मिता, अम्बिका की भूमिका में यशुप्रिया और प्रियंगुमंजरी की भूमिका में शिवानी ने जहां एक ओर चरित्र को जीवन्त कर दिया वहीं दूसरी ओर सागर सिंह ने निर्देशन जैसा गंभीर दायित्व निभाते हुए भी विलोम की भूमिका में अपने अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।

मातुल की भूमिका में अंकुश प्रसाद, दन्तुल की भूमिका में पुष्पक तथा निक्षेप की भूमिका में अभिषेक ने भी दर्शकों को बान्धे रखा। अनुस्वार के रूप में सत्यम तथा अनुनासिक के रूप में आशीष और विवेक ने काफी प्रशंसा पाई। नवोदित अभिनेत्री के रूप में रंगिनी की भूमिका में सृष्टि और संगिनी के रूप में पल्लवी का अभिनय भी सराहनीय रहा।

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