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दरभंगा

मेनका को 98.6 और श्रुति को 97.8 %

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Wed, 04 Aug 2021 04:02 AM


मेनका को 98.6 और श्रुति को 97.8 %

दरभंगा। सीवीएसई की ओर से मंगलवार को जारी 10वीं के परीक्षा परिणाम में फिर बेटियों ने ही बाजी मारी है। शहर के दिल्ली मोड़ स्थित दरभंगा पब्लिक स्कूल प्रबंधन के विशाल गौरव ने बताया कि परीक्षा में इस विद्यालय के शत-प्रतिशत बच्चों ने सफलता प्राप्त की है. मेनका कुमारी को 98.6 प्रतिशत अंक मिले हैं। कंप्यूटर शिक्षक मिहिर कुमार एवं गृहिणी सरिता देवी की पुत्री मेनका आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़ना चाहती है। वहीं, इसी स्कूल की श्रुति स्वर्णिम को 97.8 प्रतिशत अंक मिले हैं। नवीन कुमार झा और विभा झा की पुत्री श्रुति डॉक्टर बनना चाहती है। स्कूल में 97.8 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर अभिषेक कुमार रहे। 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले टॉप छात्रों में उपरोक्त तीन के अलावा ईशा रानी 97.4प्रतिशत, प्रियंका कुमारी 96.6 प्रतिशत, हर्ष 96.0 प्रतिशत, बोधानंद शंकर 95.8 प्रतिशत, वैभव राज 95.8 प्रतिशत, सोनाली गुप्ता 95.0 और दीप रोशन कुमार 95.0 प्रतिशत रहे। प्रधानाचार्य डॉ. मदन कुमार मिश्रा ने बताया कि स्कूल के कुल 231 छात्र-छात्राओं ने 10वीं की परीक्षा दी थी, जिसमें कुल 27 छात्रों का प्राप्तांक 93 प्रतिशत से भी अधिक रहा। कुल 61 छात्र-छात्राओं ने 90 फीसद से अधिक अंक प्राप्त किए जबकि 103 छात्रों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये। इन कुल प्राप्तांक परिणामों के अलावा डॉ. मिश्रा ने मेनका कुमारी अंग्रेजी एवं गणित सौ अंक, अभिषेक कुमार अंग्रेजी एवं गणित सौ अंक, श्रुति स्वर्णिम अंग्रेजी सौ अंक, ईशा रानी गणित सौ अंक एवं हर्ष गणित सौ अंक को बधाई दी है। विद्यालय प्रबंधन से विशाल गौरव ने छात्र-छात्राओं को इस रिजल्ट पर बधाई देते हुए कहा कि विद्यालय की इस उपलब्धि के पीछे छात्र-छात्राओं की अपनी मेहनत के अलावा उनके अभिभावकों का त्याग और शिक्षकों की प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि दो अप्रैल 2020 को स्कूल का उत्तर बिहार में सबसे पहले ऑनलाइन कक्षाओं की नियमित शुरुआत करने का इस रिजल्ट में बहुत बड़ा योगदान रहा है। इधर, दरभंगा पब्लिक स्कूल के छात्र अक्षत ने 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने चिकित्सक माता-पिता डॉ. अंजू अग्रवाल एवं डॉ. अभिषेक का नाम रोशन किया है। इसने अपनी बेहतर सफलता का श्रेय अपनी मां डॉ. अंजू एवं पिता को दिया है। अक्षत ने बताया कि वह अपने नाना स्व. विनय अग्रवाल के बताए रास्ते पर चलकर सदैव स्वाध्याय में लगा रहा।

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