
1400 फर्जी सिम और रोज 26 हजार कॉल; फोन एक्सचेंज खोल पूरे देश में ठगी का रैकेट
गोवा पुलिस की जांच में गौसपुर से बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से इंटरनेशन वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल को लोकल कॉल में बदलकर पूरे देश में कॉल किए जाने की बात सामने आई थी। सिम बॉक्स में 1400 सिम का इस्तेमाल हो रहा था।
नेपाल सीमा से सटे सुपौल के गौसपुर से अवैध तरीके से समानांतर फोन एक्सचेंज खोलकर पूरे देश में ठगी कर रहे साइबर शातिर 14 सौ फर्जी सिम इस्तेमाल कर रहे थे। ज्यादातर सिम वैशाली और मुजफ्फरपुर के लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से लिए गए थे। सीबीआई सिम बॉक्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल वॉयस कॉल में बदल ठगी के इस रैकेट की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अवैध फोन एक्सचेंज से केवल साइबर ठगी की गई या देश विरोधी गतिविधियों को भी अंजाम दिया गया।
गोवा पुलिस ने बीते साल अप्रैल में साइबर फ्रॉड के इस बड़े मामले का खुलासा किया था। गोवा में धरे गए एक चीनी नागरिक ने पुलिस को इसकी जानकारी दी थी। गोवा पुलिस की जांच में गौसपुर से बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से इंटरनेशन वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल को लोकल कॉल में बदलकर पूरे देश में कॉल किए जाने की बात सामने आई थी। सिम बॉक्स में 1400 सिम का इस्तेमाल हो रहा था। फर्जी सिम से हर दिन करीब 26 हजार कॉल की जाती थी।
गोवा पुलिस की सूचना पर बिहार आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने बीएसएनएल के अधिकारियों के साथ पूरे मामले की जांच की। इसके बाद बीते साल 20 जुलाई को एक्सचेंज संचालक सुपौल निवासी हर्षित मिश्रा को गिरफ्तार किया था। मामले में बिहार आर्थिक अपराध इकाई ने वैशाली के महुआ से तीन सीएससी संचालकों समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। चिह्नित किए गए सात सिम विक्रेता व डिस्ट्रीब्यूटरों की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई प्रयास कर रही है।
पुलिस व ट्राई अधिकारी बन करते थे डिजिटल अरेस्ट
ठगों ने इस एक्सचेंज के जरिए पुलिस और ट्राई का अधिकारी बनकर पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं को अंजाम दिया। यहां से जुड़े मामलों को लेकर 20 राज्यों में केस दर्ज हैं। अब सीबीआई जांच में इनकी परतें खुलने की उम्मीद है। सीबीआई की टीम ने महुआ में सिम विक्रेता एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटरों की जांच की है।





