अगर मोबाइल से लेन-देन करते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है, क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट?
साइबर ठग लोगों के मोबाइल में मौजूद पेमेंट एप की मदद से लाखों रुपये की ठगी कर ले रहे हैं। स्थिति यह है कि पटना में हो रही साइबर ठगी के अमूमन हर दूसरे मामले में यूपीआई माध्यम बन रहा है।

Cyber Crime: बिहार में डिजिटल पेमेंट का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। भुगतान करने में आसानी से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) की मदद लेकर लोग 24 घंटे बैंक खाते से सीधा भुगतान कर रहे हैं। जैसे-जैसे इसके इस्तेमाल में तेजी आ रही, वैसे ही यूपीआई की मदद से साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
साइबर ठग लोगों के मोबाइल में मौजूद पेमेंट एप की मदद से लाखों रुपये की ठगी कर ले रहे हैं। स्थिति यह है कि पटना में हो रही साइबर ठगी के अमूमन हर दूसरे मामले में यूपीआई माध्यम बन रहा है। इस ट्रेंड ने साइबर अधिकारियों को भी चिंता में डाल दिया है। साइबर विशेषज्ञों ने इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होने की अपील की है।
बैंक और बिजली विभाग हो रहे बदनाम
डिजिटल भुगतान की सुविधा होने से लोगों की नकदी पैसे पर निर्भरता खत्म हो गई है। वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति के मोबाइल में कोई ना कोई पेमेंट एप मौजूद है और वे खरीदारी के लिए यूपी्आई की मदद ले रहे हैं। वैसे तो यूपीआई भुगतान का एक सुरक्षित माध्यम हैं। लेकिन साइबर ठग सुरक्षा में सेंध लगाकर लोगों से ठगी की घटना को अंजाम दे रहे हैं। पटना में आए दिन मोबाइल चोरी की घटना के बाद लोगों के खाते से लाखों की निकासी की घटना घट रही है। वहीं, शातिर खुद को बैंक कर्मी बताकर अथवा बिजली अधिकारी बनकर लोगो से बात करते हैं। बाद में उन्हें सस्ती दर पर लोन अथवा अन्य सुविधा प्रदान करने अथवा बिजली कटने का भय दिखाकर भेजे गए लिंक के माध्यम से पीड़ित का मोबाइल हैक कर उनके खाते से लाखों का चूना लगा दे रहे हैं।
ऐसे हो रही ठगी
केस- 1
महेंद्रू की न्यू अजीमाबाद कॉलोनी निवासी नौ जून को बाजार समिति इलाके में गए थे। इसी दौरान उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया। उस फोन में ऑनलाइन पेमेंट एप मौजूद था। शातिरों ने फोन में मौजूद एप की मदद से यूपीआई द्वारा पीड़ित के पीएनबी के खाते से पांच बार में करीब दो लाख रुपये की निकासी कर ली। आरके नगर निवासी सेवानिवृत्त डीएसपी का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता है। बीते दिनों साइबर ठगों ने यूपीआई के द्वारा उनके दोनों खाते से 80 हजार रुपये उड़ा लिये। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उक्त राशि राकेश कुमार के खाते में भेजी गई है।
केस- 2
शातिरों ने धनरूआ निवासी यूपीआई के द्वारा उनके खाते से दो लाख रुपये की निकासी कर ली। खाता अपडेट करने पर पीड़ित को ठगी की जानकारी मिली। गौरीचक निवासी का फोन चार जून को अचानक से बंद हो गया। आधा घंटा बाद उनका फोन ऑन हुआ। इसके बाद पता चला कि फोन हैक कर गूगल पे के माध्यम से तीन बार में उनके खाता से 1.94 लाख रुपये उड़ा लिए गए हैं।
फोन चोरी होते ही सबसे पहले अपना सिम बंद करवा दें
साइबर विशेषज्ञ राजन सिंह ने कहा कि जागरूकता के अभाव में यूपीआई से साइबर ठगी की घटनाएं घट रही हैं। शिक्षित लोगों के पास भी तकनीकी जानकारी नहीं होती है। अधिकारी तक ठगों के चंगुल में फंस जा रहे हैं। पेमेंट एप में रीसेट पासवर्ड का आप्शन आता है। ठग चोरी के मोबाइल से पासवर्ड बदल ठगी करते हैं। फोन चोरी होते ही थाना जाने से पहले सिम बंद करवा दें व बैंक खाता को भी अस्थाई से ब्लॉक करवाएं।
लालच, घबराहट में लिंक पर रुपये ना भेजें
बैंक अथवा बिजली अधिकारी का फोन आने पर लालच, घबराहट अथवा दहशत में भेजे लिंक पर रुपये ना भेजें। मोबाइल मिरर होने पर इसका मैसेज स्क्रीन पर दिखता है। ऐसा मैसेज आते ही मोबाइल बंद कर शातिर के मंसूबे पर पानी फेर सकते हैं।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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