
मगध, शाहाबाद, मिथिला-अंग से गायब हुई कांग्रेस; सीमांचल, चंपारण ने बचा ली राहुल गांधी की लाज
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी मगध, शाहाबाद, मिथिला और अंग क्षेत्र से पूरी तरह गायब हो गई। इन क्षेत्रों में एक भी सीट कांग्रेस को नहीं मिली। हालांकि, सीमांचल और चंपारण क्षे में 6 सीटें जीतकर कांग्रेस की लाज बच गई।
बिहार विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2025 में एनडीए की आई सुनामी से कांग्रेस का राज्य के कई क्षेत्रों में सूपड़ा साफ हो गया। अपने मजबूत जनाधार वाले क्षेत्रों में भी राहुल गांधी की पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा। मगध, शाहाबाद, मिथिला, सारण और अंग क्षेत्र में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। वहीं, सीमांचल में 4 और चंपारण में दो सीटों पर मिली जीत ने कांग्रेस की लाज बचा ली।
2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी 2025 में 6 पर सिमट गई। पार्टी के सिर्फ दो विधायक ही अपनी सीट बचा पाए। अररिया से अबिदुर रहमान और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह दोबारा जीतकर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के अन्य सभी दिग्गज चुनाव हार गए। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पार्टी विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, पूर्व मंत्री अवधेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस ने 61 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे।
राहुल गांधी की पार्टी ने सीमांचल में फारबिसगंज, किशनगंज, मनिहारी और अररिया सीट जीती। वहीं चंपारण में वाल्मीकिनगर और चनपटिया सीट कांग्रेस के खाते में गई। बिहार में करारी हार के बाद पार्टी के दिग्गज मंथन में जुट गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि हार के पीछे प्रमुख कारण पार्टी ही नहीं, महागठबंधन स्तर पर रणनीतिक समन्वय का अभाव रहा। कांग्रेस की वोट चोरी का मुद्दा बिहार के मतदाताओं को लुभा नहीं पाया। गठबंधन की दरार ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया। पार्टी के 10 प्रत्याशी के खिलाफ घटक दल के ही प्रत्याशी थे। इन सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
टिकट बंटवारे की नाराजगी को भी पार्टी पदाधिकारी शांत नहीं कर पाए। ऐसे में कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को भितरघात से जूझना पड़ा।
बाहरी और दूसरे दल के नेताओं को टिकट देने का आरोप लगा। पार्टी के कई वरीय पदाधिकारी चुनाव से ठीक पहले घर बैठ गए। इन सबका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। चुनाव नतीजों में इसका असर साफ दिखा।





