
कांग्रेस का लालू-तेजस्वी को संदेश- सबको ‘अच्छी सीट’ मिले; 2020 में 70 लड़ी थी, 51 हार गई
बिहार में राहुल गांधी की यात्रा से उत्साहित कांग्रेस ने कहा है कि महागठबंधन के सीट शेयरिंग में ‘अच्छी सीटों’ और ‘खराब सीटों’ का संतुलन होना चाहिए। पिछले चुनाव में 70 सीटों पर कांग्रेस लड़ी थी, लेकिन मात्र 19 ही जीत पाई थी।
बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत 70 विधानसभा लड़कर 19 सीट जीती कांग्रेस ने 2025 के चुनाव में सहयोगी पार्टियों के बीच ‘अच्छी सीटों’ और ‘खराब सीटों’ के संतुलित बंटवारे पर जोर दिया है। राहुल गांधी की यात्रा से उत्साहित कांग्रेस का यह संदेश लालू यादव और तेजस्वी यादव के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि 2020 में मात्र 12 सीट से सरकार बनाने से चूकने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को जिम्मेदार मानते हैं। लालू और तेजस्वी ने इस बार कांग्रेस पर सीट कटौती का दबाव बना रखा है।

कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने कहा- ‘गठबंधन में नए दल शामिल होंगे तो सबको अपने हिस्से (सीट) से योगदान देना होगा, तभी नए लोगों को जगह मिलेगी। हर प्रदेश में ‘अच्छी’ और ‘खराब’ सीटें होती हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी को सब अच्छी सीट मिले और किसी को सभी खराब सीट।’ अल्लावरु ने जोर देकर कहा है कि सीट बंटवारे में ‘अच्छी’ और ‘खराब’ सीट का संतुलन होना चाहिए।
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अल्लावरू ने कहा- ‘कौन पार्टी कितनी सीटें त्याग रही है, उससे पहले यह जानना जरूरी है कि कितने नए दल महागठबंधन में आ रहे हैं और उन्हें कितनी सीटें दी जा रही हैं। हमारा मानना है कि हर पार्टी को अपने हिस्से से उचित अनुपात में सीट देनी होंगी।’ उन्होंने कहा कि समय रहते सीट बंटवारे पर बातचीत को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाने में सफलता मिल रही है। राज्य प्रभारी ने बताया कि ब्लॉक और जिला से दावेदारों के नाम 14 सितंबर तक आ जाएंगे और फिर 19 सितंबर से स्क्रीनिंग कमेटी का काम शुरू हो जाएगा।
2020 के चुनाव में कांग्रेस से दोगुना रहा था सीपीआई-माले का स्ट्राइक रेट
याद दिला दें कि 2020 के चुनाव में महागठबंधन में राजद 144, कांग्रेस 70, सीपीआई-माले 19, सीपीआई 6 और सीपीएम 4 सीटों पर लड़ी थी। महागठबंधन को चुनाव नतीजों में 110 सीटों से संतोष करना पड़ा था और वो 12 सीटों के अंतर से सरकार बनाने से चूक गई थी। 243 सीटों की विधानसभा में लगभग दो तिहाई सीटें लड़कर राजद ने 52 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ 75 सीटें जीती थी। करीब एक तिहाई सीटें लड़ी कांग्रेस 27 फीसदी स्ट्राइक रेट से 19 सीटें ही झटक पाई थी। सबसे अच्छा स्ट्राइक रेट सीपीआई माले का रहा था, जिसने 63 परसेंट के साथ 12 सीटों पर जीत हासिल की। 50 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ सीपीएम ने 2 और 33 परसेंट स्ट्राइक रेट पर सीपीआई ने 2 सीटें निकाली थी।
कांटे की टक्कर में एनडीए और महागठबंधन के बीच था 12 हजार वोटों का अंतर
2020 के चुनाव में महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांंत्रिक गठबंधन को मिले कुल वोटों में लगभग 12 हजार का अंतर था। वोट परसेंट में अंतर 0.03 फीसदी था। एनडीए को साधारण बहुमत से 3 ज्यादा कुल 125 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 74, जेडीयू ने 42, वीआईपी और हम ने 4-4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों गठबंधन के अलावा जीते 8 विधायकों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के 5, चिराग पासवान की लोजपा के 1, मायावती की बसपा के 1 और 1 निर्दलीय शामिल था। वीआईपी के विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए जबकि इकलौते बसपा और निर्दलीय विधायक नीतीश के साथ होकर मंत्री गए।





