बिहार में पड़ेगी कड़ाके की ठंड, दिसंबर में 10 डिग्री से नीचे जाएगा पारा; शीतलहर के इंतजाम शुरू
Cold Wave in Bihar: बिहार में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होने वाला है। राज्य सरकार इसके लिए अलर्ट मोड पर आ गई है। सभी जिलों में शीतलहर से निपटने के पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। दिसंबर महीने में तापमान 10 डिग्री सेल्सिय से नीचे जाने वाला है।

Cold Wave in Bihar: बिहार में दिसंबर महीने में कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार हैं। अगले सप्ताह से न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट आएगी। दिसंबर महीने के दूसरे सप्ताह से कड़ाके की ठंड पड़ने की आशंका हैं। इस दौरान राज्य के ज्यादातर शहरों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास या इससे नीचे पहुंच जाएगा। राज्य सरकार ने इससे बचाव की तैयारी शुरू कर दी है। सभी जिलों से समय पर बचाव के इंतजाम कर लेने को कहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने शीतलहर से बचाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) जारी की है। विभाग ने कहा है कि दिसंबर से जनवरी के बीच भयावह शीतलहर गिरती है। इस वर्ष भी तापमान गिरना शुरू हो गया है। इसलिए अविलंब इसके बचाव के उपाय कर लिए जाएं।
सभी जिलों को जारी मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) में आपदा प्रबंधन विभाग सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा है कि शहरी और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में बेघरों, रिक्शा चालकों, मजदूरों, बेसहारों को ठंड से बचाव के इंतजाम कर लें। उनके लिए रैनबसेरे बनाएं। अलाव की व्यवस्था करें। रैनबसेरे का इंतजाम संबंधित निकाय और अलाव की व्यवस्था जिला प्रशासन करेगा। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। अस्पतालों में जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। पशुधन को भी बचाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
सार्वजनिक जगहों पर अलाव के इंतजाम करें
आपदा प्रबंधन विभाग सचिव ने सभी डीएम से कहा कि मौसम विभाग से समन्वय बनाकर रखें ताकि जानमाल का नुकसान कम किया जा सके। शीतलहर के दौरान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। नगर विकास, स्वास्थ्य, ऊर्जा, समाज कल्याण, परिवहन, कृषि एवं पशुपालन विभाग को एसओपी का अनुपालन कराएं। आश्रय गृहों में पर्याप्त कंबल रखे जाएं। प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय स्तर तक सार्वजनिक जगहों पर अलाव के इंतजाम हों।
फसल और पशुधन बचाव के लिए करें जागरूक
आपदा प्रबंधन विभाग सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा है कि शीतहलर से फसलों को भी क्षति पहुंचती है। इससे बचाव के लिए किसानों को जागरूक करें। पशुधन की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं।


