
मैं खुद सवर्ण हूं, लेकिन... यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में उतरे कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान
पटना के मशहूर कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि वह खुद सवर्ण हैं लेकिन इन नियमों का वे समर्थन करते हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समानता नियमों को लेकर बिहार समेत देश भर में हंगामा मचा है। खासकर सवर्ण वर्ग के लोग इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। इस बीच पटना के चर्चित कोचिंग शिक्षक गुरु रहमान ने यूजीसी के नए इक्विलिटी रूल्स का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वह खुद सवर्ण हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी में उन्होंने धर्म, लिंग, जाति के आधार पर भेदभाव होते देखा है। इसलिए समानता लाने के लिए ये नियम जरूरी हैं।
पटना में आज तक से बातचीत में गुरु रहमान ने मंगलवार को कहा, "मैं खुद सवर्ण हूं, बावजूद इसके जिस यूनिवर्सिटी से मैंने पढ़ाई की, वहां देखा है कि लोगों के साथ भेदभाव होता है। इसलिए मैं यूजीसी के नए नियमों का समर्थन करता हूं। समानता तभी आएगी जब लोगों के मन में भय रहेगा। भय का वातावरण इसलिए पैदा किया गया है ताकि कोई किसी के खिलाफ न बोले। जब कोई किसी के विरूद्ध नहीं बोलेगा तो अपने आप समानता आ जाएगी।"
गुरु रहमान ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और कहा कि सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में यूजीसी इक्विटी बिल लाया गया है, सवर्ण चाहे इसका विरोध करे, उनका भी विरोध करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
बता दें कि यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव को रोकने के लिए इक्विटी नियम लागू किए हैं। सवर्ण वर्ग इसका विरोध कर रहा है। जनरल कैटगरी के छात्र-छात्राओं और लोगों क कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है। देश भर में इस पर हंगामा मचा हुआ है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। उत्तर प्रदेश में एक भाजपा नेता और एक अधिकारी ने पद से इस्तीफा भी दे दिया।





