सम्राट ने 12 साल पहले जीता नीतीश का भरोसा, लालू की RJD तोड़कर CM के साथ उड़ गए थे

Ritesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Samrat Choudhary Profile: बिहार में भाजपा के पहले सीएम सम्राट चौधरी की ताजपोशी के पीछे जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार का समर्थन महत्वपूर्ण है। 12 साल पहले राजद को तोड़कर सम्राट ने नीतीश का दिल जीता था और उनके साथ उड़ गए थे।

सम्राट ने 12 साल पहले जीता नीतीश का भरोसा, लालू की RJD तोड़कर CM के साथ उड़ गए थे

Samrat Choudhary Profile: बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का पहला मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी के प्रमोशन में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और पूर्व सीएम नीतीश कुमार का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी अपने जमाने के कद्दावर नेता हैं और जब नीतीश ने समता पार्टी बनाई थी, तब वो उनके साथ ‘लव-कुश’ समीकरण के सूत्रधार थे। शकुनी नीतीश के पुराने साथी हैं। कभी नीतीश को हटाकर ही मुरेठा खोलने की बात करने वाले सम्राट पर नीतीश का भरोसा कोई 2024 में डिप्टी सीएम बनने के बाद नहीं पैदा हुआ है। सम्राट ने यह भरोसा 12 साल पहले 2014 में ही लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को तोड़कर हासिल किया था। तब नीतीश भाजपा से गठबंधन तोड़कर अकेले थे। राजद को तोड़ने के बाद सम्राट नीतीश के साथ हेलिकॉप्टर से उड़कर परबत्ता गए थे, जो उनकी विधानसभा सीट थी।

नीतीश ने नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाने के विरोध में 2013 में बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंदन तोड़ लिया था। उस समय कांग्रेस, लेफ्ट और कुछ निर्दलीय की मदद से नीतीश ने सदन में बहुमत साबित किया था, लेकिन नंबर का तनाव बना रहता था। ऐसे माहौल में लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव की पार्टी के विधानसभा में चीफ व्हिप सम्राट चौधरी ने राजद के 22 में से 13 विधायकों को तोड़कर सदन में अलग मान्यता मांग ली थी। बाद में 6 विधायक यह बोलकर पलट गए कि उनका दस्तखत फर्जी है या कुछ और बोलकर साइन कराया। सम्राट तब समय परबत्ता विधायक थे और सीएम के हेलिकॉप्टर में सवार होकर अपने इलाके में नीतीश को लेकर गए थे।

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57 साल के सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर कई दलों से होते हुए भाजपा में पहुंचने के बाद ही परवान चढ़ा है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कांग्रेस से समता पार्टी होते हुए राजद, जदयू और हम में रहे। सम्राट का सफर राजद से शुरू होकर जदयू और हम से होते हुए भाजपा तक पहुंचा। राजद की राबड़ी देवी सरकार में जब वो पहली बार मंत्री बने तो भाजपा के सुशील मोदी ने उनकी उम्र पर सवाल उठाया तो राज्यपाल ने उनको हटा दिया था। बाद में वो राजद के टिकट पर परबत्ता सीट से दो बार जीते। 2014 में राजद छोड़ने के बाद सम्राट और शकुनी जदयू में शामिल हो गए।

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लेकिन, 2015 के विधानसभा चुनाव में जब नीतीश और लालू ने हाथ मिलाया तो वो जीतनराम मांझी के साथ हम में चले गए। विधानसभा चुनाव में हम की शर्मनाक हार हुई। खुद शकुनी चौधरी तारापुर से हार गए। शकुनी ने हम का प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ा और राजनीति से संन्यास लेने की घोषण तक कर दी। कुछ समय राजनीतिक माहौल और संभावना तलाशने के बाद सम्राट चौधरी भाजपा के संग हो गए। रोचक बात यह है कि समय बदला तो वही सुशील मोदी सम्राट को भाजपा में लेकर आए।

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भाजपा में 2017 में शामिल हुए सम्राट ने तेजी से अपनी जगह बनाई और रफ्तार के साथ तरक्की की है। भाजपा को सम्राट के तौर पर एक आक्रामक ओबीसी चेहरा मिला, जिसे पार्टी ने कुशवाहा वोट बैंक को साधने के मकसद से आगे बढ़ाया। सम्राट को जल्द ही प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष का पद मिल गया। बाद में भाजपा ने 2020 में सम्राट को विधान पार्षद बनाया। नीतीश सरकार में सम्राट को पहली बार भाजपा ने पंचायती राज मंत्री बनवाया। उसके बाद सम्राट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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आज की तारीख में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पसंदीदा पिछड़े नेता सम्राट चौधरी को जब 2022 में भाजपा ने विधान परिषद में नेता विपक्ष बनाया तो उनके आक्रामक राजनीतिक तेवर ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को प्रभावित किया। फिर वो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बना दिए गए। नीतीश 2024 में जब महागठबंधन से लौटे तो सम्राट को पहली बार भाजपा विधायक दल का नेता और डिप्टी सीएम बनाया गया। लगभग दो साल में सम्राट ने राजनीतिक लगन और कौशल से अपने पदनाम के आगे लगा डिप्टी हटाकर बतौर मुख्यमंत्री बिहार की बागडोर थाम ली है।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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