फर्जी आधार में चीनी ऐप से हो रहा खेल , घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने में 71 गिरफ्तार
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने राज्यभर में फर्जी पहचान पत्र व दस्तावेज बनाये जाने के 815 मामले चिह्नित करते हुए 416 मामलों का सत्यापन कराया है। इसके आधार पर 23 जिलों में 44 मामले दर्ज हुए हैं। 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी हुई है।

बिहार में चीनी ऐप और अवैध रूप से संचालित वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी आधार और अन्य पहचान पत्र के कई मामले पकड़े जाने के बाद जांच और कार्रवाई तेज हुई है। गृह मंत्रालय को आशंका है कि फर्जी आधार का प्रयोग भारत में घुसपैठियों को स्थापित कराये जाने के लिए किया जा रहा है। उधर, पटना हाईकोर्ट ने भी फर्जी आधार के एक मामले की जांच में सामने आए साक्ष्यों का रिकॉर्ड तलब किया।
नेपाल से सटे जिलों में घुसपैठ को लेकर चिंतित गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं। इसके बाद मामले में कार्रवाई शुरू हुई। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने राज्यभर में फर्जी पहचान पत्र व दस्तावेज बनाये जाने के 815 मामले चिह्नित करते हुए 416 मामलों का सत्यापन कराया है। इसके आधार पर 23 जिलों में 44 मामले दर्ज हुए हैं। 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी हुई है। सबसे अधिक मामले सारण, सहरसा, सुपौल, नालंदा, मधुबनी, सीतामढ़ी, गया जी व मुजफ्फरपुर में मिले हैं। सारण में सात मामलों में आठ अभियुक्त गिरफ्तार किए गये।
मुजफ्फरपुर में ऐसे तीन मामले पकड़े गए, जिनमें से एक मामले के आरोपित की अपील पर पटना हाईकोर्ट ने पुलिस से साक्ष्यों का रिकॉर्ड मांगा है। मुजफ्फरपुर पुलिस ने सात मई को औराई के धरहरवा गांव निवासी साइबर कैफे संचालक शिवम व राजू कुमार तथा सीतामढ़ी के श्रीखंडी निवासी अनुरा झा को गिरफ्तार किया था। वहीं, 10 मई को सरैया थाना क्षेत्र के विपिन कुमार को पकड़ा गया। गिरफ्तार चार आरोपितों में से तीन पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। मास्टरमाइंड श्रवण गिरफ्त से बाहर है। विपिन की जमानत याचिका पर गत मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस से केस की जांच से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। मामले में चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी?
कुछ ऑनलाइन वेबसाइट का दुरूपयोग कर फर्जी आधार व अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज बनाने के मामलों में कार्रवाई की गयी है। 23 जिलों में 44 प्राथमिकी दर्ज करते हुए 71 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। संबंधित गिरोह के नेटवर्क और लिंक का विश्लेषण हो रहा है। - रंजीत मिश्रा, आईजी, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई
बाबा आरटीपीएस, राजमिस्त्री डॉट शॉप का इस्तेमाल
जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेज पीएसप्रिंटडॉटएक्सवाइजेड, बाबा आरटीपीएस डॉट एक्सवाइजेड व राजमिस्त्री डॉट शॉप नामक वेबसाइट से तैयार किये गए। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक ऐसे वेबसाइटों का इस्तेमाल बंद हो गया। आरोपी लोगों के असली दस्तावेज या कॉपी लेकर दूसरे व्यक्तियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं।
फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल घुसपैठियों को स्थापित करने के साथ ही सिम कार्ड लेने, फर्जी या म्यूल बैंक खाता खोलने, केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने तथा अन्य साइबर एवं वित्तीय अपराधों में किये जाने की भी आशंका है।
पहचान पत्रों के दुरुपयोग से ऐसे बचें
● आधार, जन्म प्रमाण पत्र, पैन अथवा अन्य पहचान दस्तावेजों की प्रति अनजान व्यक्ति, दुकान या अविश्वसनीय ऑनलाइन वेबसाइट को न दें।
● किसी सरकारी योजना, सिम, लोन, केवाईसी के नाम पर दस्तावेज मांगे जाने पर संबंधित संस्था की प्रमाणिकता जरूर सत्यापित कर लें।
● आधार की छायाप्रति दे रहे तो उस पर उद्देश्य और तारीख लिखें, ताकि उसका अन्य प्रयोजन में उपयोग न हो सके।
● अपने आधार बायोमेट्रिक्स को आधार वेबसाइट अथवा एमआधार एप के माध्यम से लॉक रखें।
● संदिग्ध गतिविधि का संदेह होने पर आधार ऑथेंटिकेशन इतिहास की जांच करें। तत्काल 1930 पर संपर्क करें।


