Chhath Puja: पटना के इन 13 छठ घाटों पर अर्घ्य देने ना जाएं, प्रशासन ने लगाई रोक
पटना में 13 छठ घाटों पर अर्घ्य देने से रोक लगा दी गई है। छठ महापर्व के दौरान जिला प्रशासन ने इन घाटों को खतरनाक और अनुपयुक्त श्रेणी में डाल दिया है। छठ व्रतियों से इन घाटों पर ना जाने की हिदायत दी गई है।
बिहार की राजधानी पटना में के 13 घाटों पर इस बार छठ व्रती अर्घ्य नहीं दे पाएंगे। गंगा नदी के किनारे स्थित इन घाटों पर जलस्तर की स्थिति, कटाव और अन्य कारणों को देखते हुए सतर्कतावश इन पर छठ व्रतियों के अर्घ्य देने पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने शहर के 6 छठ घाटों को खतरनाक बताया है, जबकि 7 अन्य घाटों को अनुपयुक्त की श्रेणी में डाला है। इन सभी छठ घाटों को लाल कपड़े से घेर दिया गया है।
पटना जिला प्रशासन ने जिन छठ घाटों को खतरनाक श्रेणी में डाला है, उनमें कंटाही घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, बुद्धा घाट और नया पंचमुखी चौराहा घाट शामिल हैं। इसके अलावा टीएन बनर्जी घाट, मिश्री घाट, जजेज घाट, अदालत घाट, बुंदेल टोली घाट, अदरख घाट और गुलबी घाट को भी अनुपयुक्त घाट की श्रेणी में डाला गया है। व्रतियों से अपील की गई है कि वे आसपास के अन्य सुरक्षित घाटों पर ही अर्घ्य देने पहुंचें।
पटना शहर में 200 से ज्यादा जगहों पर छठ पूजा अर्घ्य देने की व्यवस्था
पटना जिले में गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के 550 घाटों पर व्रतियों द्वारा छठ पूजा की जाएगी। इसके अलावा पार्क और तालाबों में भी छठ व्रतियों के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। इनमें पटना नगर निगम क्षेत्र में 200 से ज्यादा जगहों पर छठ व्रतियों के लिए इंतजाम किए गए हैं। इनमें गंगा नदी के किनारे के लगभग 102 घाटों के अलावा 45 पार्क और 63 तालाब भी शामिल हैं।
शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था
छठ व्रतियों के लिए पटना के शहरी क्षेत्रों में नदी घाटों पर 400 अस्थायी चेंजिंग रूम और 552 अस्थायी शौचालय बनाए गए हैं। 171 वॉच टावरों के जरिए व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 अस्थायी यूरिनल बनाए गए हैं। घाटों पर पानी का 50 टैंकर लगाए गए हैं। इसके अलावा 37 चापाकल भी लगाए गए हैं। 13 यात्री शेड, 112 नियंत्रण कक्ष, 13 सहायक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
पटना के डीएम डॉ. एसएम त्यागराजन ने शुक्रवार को बताया कि भीड़-प्रबंधन के लिए सभी जगह तैयारियां अंतिम चरण में है। आपदा प्रबंधन की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार किसी भी तरह की आपदा की आकस्मिकता से निपटने हेतु एनडीआरएफ की 9 टीमें (277 सदस्य), एसडीआरएफ की 9 टीमें (36 सदस्य), 444 गोताखोर, 323 नाव/नाविक तथा सिविल डिफेंस के 149 वॉलंटियर्स तैनात रहेंगे। रिवर पेट्रोलिंग भी की जाएगी।

लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत बिहार में राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं पर गहराई से नजर रखते हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर के मुद्दे पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। जयेश मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं और लाइव हिन्दुस्तान में 4 साल से बिहार टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले ईटीवी भारत, इंडिया न्यूज, वे2न्यूज और टाइम्स ऑफ इंडिया में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। समाचार लेखन के अलावा साहित्यिक पठन-लेखन में रुचि है।
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