हर साल दस से अधिक वार्डों में पेयजल संकट झेलते हैं लोग
गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है। नगर निगम की तैयारी अधूरी है और वित्तीय अधिकारों के अभाव में समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। कई वार्डों में पानी की आपूर्ति ठप है और लोग पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इस बार भी तैयारी अधूरी; वित्तीय शक्ति के अभाव में अटका समाधान फोटो 2 अक्सर खराब रहने वाली दहियांवा की जलमीनार पेज चार की लीड छपरा, एक संवाददाता।गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है। नगर निगम के 45 वार्डों में से हर साल करीब दस से अधिक वार्ड ऐसे हैं। जहां लोगों को भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। इस बार भी हालात अलग नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि अब तक नगर निगम की ओर से कोई ठोस तैयारी नहीं की गई है। गुरुवार को सशक्त स्थायी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा जरूर हुई लेकिन नगर आयुक्त के पास वित्तीय अधिकार नहीं होने से जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है।सबसे
अधिक समस्या वार्ड 1, 9, 11, 12, 14, 15, 19, 20 और 21 में देखने को मिलती है। हर साल मोटर जलने और जलस्तर नीचे जाने से पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है। पिछले साल भी इन इलाकों में कई दिनों तक लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ा था। इस बार भी स्थिति वैसी ही बनती दिख रही है। सफाई कर्मी और जलापूर्ति से जुड़े कर्मचारी भी इस स्थिति से परेशान हैं। एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नगर निगम के पास न तो मरम्मत के लिए पैसा है और न ही डीजल तक की व्यवस्था हो पा रही है। अगर यही स्थिति रही तो इस बार संकट और गहरा सकता है। पार्षदों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हो रही है। पूर्व वार्ड पार्षद विकास कुमार सैनी ने बताया कि पूर्वी दहियावां में जलापूर्ति टंकी से रोजाना सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। हमने कई बार नगर निगम और बुडको को लिखित शिकायत दी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक तरफ लोग पानी के लिए तरस रहे हैं और दूसरी तरफ पानी सड़कों पर बह रहा है। शहर के मिशन रोड निवासी सुपेंद्र चौधरी ने शुक्रवार की सुबह ही हिंदुस्तान को बताया कि उनके घर के सामने नल जल का पाइप कई दिनों से फूटा हुआ है। पाइप फटने के कारण हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। शिकायत के बावजूद किस दिशा में पहल नहीं की जा रही है। आम लोगों को आवागमन करने में काफी परेशानी होने लगी है।पूर्व पार्षद अनिल बैठा ने बताया कि शहर के कई इलाकों में डेढ़-दो साल से चापाकल खराब पड़े हैं। गांधी चौक से नेहरू चौक तक कई जगह लोग पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। महादलित बस्तियों में तो लोग अपने पैसे से चापाकल की मरम्मत करा रहे हैं।शहर के आम लोग भी पेयजल संकट को लेकर चिंतित हैं। दहियावां निवासी रौशन कुमार ने बताया कि सुबह के समय पानी का दबाव बहुत कम रहता है। कई बार तो गंदा पानी भी आता है।जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है। वहीं राजेंद्र कॉलेज के पास रहने वाले अमन प्रताप ने कहा कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण कई वार्डों में छह महीने से पानी नहीं आ रहा है। शिकायत के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिलता है। नगर निगम क्षेत्र में करीब 800 चापाकल हैं, जिनमें आधे से अधिक खराब पड़े हैं। पहले पीएचईडी के पास जिम्मेदारी रहने पर समय पर मरम्मत हो जाती थी लेकिन छह-सात साल पहले यह जिम्मेदारी नगर निगम को मिलने के बाद स्थिति लगातार बिगड़ती गई है। वहीं जलापूर्ति योजना के तहत बनाई गई जलमीनारों की क्षमता 1200 किलोलीटर है लेकिन रखरखाव और पाइपलाइन लीकेज के कारण इसका पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। फेज-टू योजना के तहत 25 वार्डों में पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वार्ड 25, 26, 27 और 36 में पिछले छह माह से आपूर्ति ठप है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लीकेज ठीक करने के लिए पथ निर्माण विभाग से अनुमति मांगी गई है और अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर साल की तरह इस बार भी शहर के लोग भीषण गर्मी में पेयजल संकट से जूझने को मजबूर दिख रहे हैं। नई कॉलोनी कंपनी बाग के 27 घरों में जलापूर्ति नहीं शहर के वार्ड 14 स्थित भगवान बाजार थाना के सामने नई कॉलोनी कंपनी बाग के 27 घरों को नल जल का कनेक्शन देने के बावजूद भी पिछले 1 साल से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। कंपनी बाग निवासी व टैक्सेशन बार एसोसिएशन के डॉक्टर ब्रजेश कुमार शर्मा ने बताया कि पानी की आपूर्ति के लिए यहां के लोगों ने बुडको व निगम कार्यालय का काफी दिनों तक चक्कर लगाया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। वार्ड 14 के पार्षद संजीव रंजन भोदा ने बताया कि हमारे वार्ड में हनुमान मंदिर के पीछे के जल मीनार से पानी की आपूर्ति होती है। इस जल मीनार की मोटर हमेशा जल जाती है। अभी हाल में मोटर के जलने से पिछले कई माह से लोगों को पानी मुहैया नहीं हो पा रहा था। बार-बार मोटर के जल ने की शिकायत की जा रही है। लेकिन इस पर संज्ञान विभाग के पदाधिकारी के द्वारा नहीं लिया जाता।
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