
राहर दियारा में एक साथ उठी दो कामगारों की अर्थी
सोनपुर में एक निर्माण कार्य के दौरान करंट लगने से दो कामगारों, देवेन्द्र राय और नीतीश कुमार की मौत हो गई। दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे, जिससे मातम छा गया। नीतीश अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था और उसकी शादी तय हो गई थी। परिवार में दुख का माहौल है।
पोस्टमार्टम के बाद दोनों कामगारों का शव पहुंचते ही गांव में मातम और परिजनों में मचा कोहराम ई रिक्शा चला कर घर खर्च में अपने पिता को सहयोग करता था नीतीश सोनपुर में मकान निर्माण के दौरान शुक्रवार की दोपहर करंट लगने से सोनपुर थाने के राहर दियारा निवासी देवेन्द्र राय और नीतीश कुमार की हो गई थी मौत सोनपुर। संवाद सूत्र सोनपुर नगर पंचायत के सोनपुर आदम स्थित एक घर में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान शुक्रवार की दोपहर हाई वोल्टेज तार की चपेट में आने से सोनपुर थाने की नजरमीरा पंचायत के राहर दियारा वार्ड संख्या 06 निवासी ब्रहम देव राय के पुत्र देवेन्द्र राय और वही के वार्ड संख्या 05 निवासी आमोद राय के पुत्र लगभग 20 वर्षीय नीतीश कुमार की शुक्रवार की दोपहर मौत हो गई थी ।
हाजीपुर सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचते ही गांव में मातम और परिजनों में कोहराम मच गया। देखते ही देखते उनके पैतृक आवास पर सैकड़ों ग्रामीण की भीड़ एकत्र हो गई। मृतक के परिजनों के रोने व विलाप करने से माहौल काफी गमगीन हो गया था। सबकी आखों में आंसू थे। अंतिम संस्कार के लिए मोहल्ला से जब एक साथ दो अर्थी उठी तो लोगों का कलेजा दहल उठा। नीतीश अपने माता- पिता का इकलौता चिराग था। नीतीश की भी शादी तय हो गई थी। उसका फलदान भी हो गया था। मार्च में होली के बाद उसकी शादी होने वाली थी। मृतक नीतीश कुमार के पिता आमोद राय राजमिस्त्री का काम करते हैं। मेंहनत- मजदूरी कर वे अपने परिवार का भरण- पोषण करते हैं। नीतीश ई - रिक्शा चलाया करता था। ई - रिक्शा चला कर वह घर का खर्च उठाने में अपने पिता को सहयोग करता था। इन दिनों वह ई रिक्शा चलाना बंद कर दिया था। शुक्रवार को वह घर पर ही था। उसके पिता राजमिस्त्री का काम करने सोनपुर आदम जा रहे थे। उनके कहने पर नीतीश भी अपने पिता के साथ काम करने गया था। उसको क्या पता था कि यह उसके जीवन का अंतिम दिन होगा। उसकी शादी की खुशियां अचानक मातम में बदल गई। परिवार के सारे सपने टूट कर बिखर गए। दूसरी ओर मृतक देवेन्द्र राय के परिवार की भी माली स्थिति अच्छी नहीं है। वे दैनिक मजदूर थे। मेहनत - मजदूरी कर वे अपनी पत्नी- बच्चों का भरण- पोषण किया करते थे। पत्नी- बच्चों का सहारा छिन गया।

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