
पारंपरिक पकवानों के जायके ने बढ़ाई सोनपुर मेले की रौनक
संक्षेप: सोनपुर मेले में पारंपरिक पकवानों का आनंद लेने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। गुड़ही जलेबी, लिट्टी-चोखा और मियां मिठाई की पापड़ी जैसे देसी व्यंजन सैलानियों को आकर्षित कर रहे हैं। मेले में घरेलू अचार और मिठाइयों की दुकानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक है।
गुड़ही जलेबी लोगों को स्वाद में भर रही आनंद, भा रहा लिट्टी-चोखा पापड़ी और गुड़ जलेबी पर उमड़ रही मेलार्थियों की भीड़ मियां मिठाई की पापड़ी और देसी व्यंजनों ने खींचा सैलानियों का स्वाद छपरा, हमारे प्रतिनिधि। पारंपरिक पकवानों के जायके ने सोनपुर मेले की रौनक बढ़ा दी है। गुड़ही जलेबी लोगों को स्वाद में आनंद भर रही है तो लिट्टी-चोखा भी खूब भा रहा है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक सोनपुर मेला इस वर्ष भी लजीज व्यंजन, पारंपरिक मिठाइयों, घरेलू अचार और देसी नमकीन के कारण सैलानियों की पहली पसंद बना हुआ है। पर्यटक जहां एक ओर पशु मेले और धार्मिक दर्शन का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मेले के कोने-कोने में सजी स्थानीय पकवानों की दुकानों ने लोगों के कदम थाम लिए हैं।

लकड़ी बाजार से लेकर नखास, हरिहरनाथ मंदिर रोड और चिड़िया बाजार तक देसी मिठाइयों, पापड़ी, लिट्टी-चोखा और पारंपरिक अचार का स्वाद मेले की पहचान बन गया है। शहर और गांवों से आने वाले मेलार्थियों की पसंद में हो रहा लगातार बदलाव इस बार गुड़ की जलेबी ने विशेष आकर्षण पैदा किया है। नखास, गज-ग्राह चौक, हरिहरनाथ मंदिर रोड और चिड़िया बाजार में लगी दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दुकानदारों के अनुसार इस वर्ष गुड़ की जलेबी 80 से 100 रुपये प्रति किलो के दर में उपलब्ध है। देसी घी और ताजा गुड़ से तैयार यह जलेबी स्वाद में ऐसी है कि कई सैलानी दो-तीन किलो तक खरीदकर अपने साथ ले जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि शहर और गांवों से आने वाले मेलार्थियों की पसंद में लगातार बदलाव हो रहा है, लेकिन गुड़ की जलेबी का क्रेज साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। ‘मियां मिठाई’ पापड़ी-मेले की खास पहचान सोनपुर मेला की मिठाइयों में ‘मियां मिठाई’ यानी पापड़ी का स्वाद अलग ही स्थान रखता है। लकड़ी बाजार में लगी दुकान पर सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। फतुहा के जेठूली निवासी सतेंद्र राय पिछले पांच वर्षों से यहां अपनी मशहूर पापड़ी बेच रहे हैं। गेहूं, चीनी और घी से तैयार की जाने वाली यह पापड़ी मेले की विशेष सौगात मानी जाती है। हल्की कुरकुराहट और देसी घी की सुगंध इसे अनोखा स्वाद देती है। मुजफ्फरपुर से आए लोकनाथ मिश्र बताते हैं कि इस मिठाई के स्वाद की वजह से मैं हर साल यहां वापस आता हूं। छपरा के विशाल कुमार बताते हैं कि पापड़ी की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। इसके साथ ही खजूर और गाजर का हलवा भी सैलानियों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहा है। स्वाद और देसीपन का सैलानियों में आकर्षण बिहार की पहचान मानी जाने वाली लिट्टी-चोखा भी सोनपुर मेला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए हुए है। रेलवे प्रदर्शनी क्षेत्र और संगत ग्रैंड वेंकट के पास लगी लिट्टी-चोखा की दुकानों पर शाम ढलते ही लंबी कतारें लग जाती हैं। अंगीठी पर सिकी लिट्टी को शुद्ध घी में डुबोकर बैगन, आलू, टमाटर और धनिया की चटनी के साथ परोसा जाता है। 10 से 15 रुपये प्रति लिट्टी की कीमत होने के बावजूद स्वाद और देसीपन का आकर्षण सैलानियों को बार-बार यहां खींच लाता है। घरेलू अचार की महक से महका मेला चिड़िया बाजार रोड पर पारंपरिक घरेलू अचार की दुकानों ने भी लोगों का खास ध्यान आकर्षित किया है। गांवों में तैयार आम, नींबू, हरी मिर्च और मिक्स्ड फ्लेवर के अचार 100 से 500 रुपये प्रति किलो के दाम पर बेचे जा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि यह अचार किसी बड़े ब्रांड का नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और परंपरा का परिचय है। यही वजह है कि कई सैलानी इस अचार को उपहार के रूप में भी साथ ले जा रहे हैं। व्यंजनों की विविधता बढ़ा रही मेले की रौनक मेले के आयोजकों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि देसी व्यंजनों, मिठाइयों और घरेलू उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता मेले की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत कर रही है। उनसे मिलने वाला फीडबैक यह है कि इस तरह की पारंपरिक झलक आने वाले वर्षों में भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती रहेगी। सोनपुर मेला इस वर्ष न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए, बल्कि अपने अनूठे व्यंजनों और घरेलू स्वाद की वजह से भी लोगों की चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लजीज पकवानों की खुशबू और पारंपरिक स्वाद का ऐसा मेल विरले ही किसी मेले में देखने को मिलता है। -- सप्ताह भर बाद भी अधिकतर प्रदर्शनियां नहीं हो सकी शुरू हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेले में उमड़ी दर्शकों की भीड़ सोनपुर, संवाद सूत्र। एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में मेलार्थियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। बीते 09 नवंबर को 32 दिनों तक चलने वाले इस मेले का विधिवत उद्घाटन के बाद पहला रविवार छुट्टी का दिन होने के कारण मेले में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेला पहुंचने वाला शायद ही कोई ऐसा मार्ग था जिस पर लोगों की भीड़ न थी। हरिहर नाथ से ड्रोलिया चौक तक तिल रखने तक की जगह नहीं थी। लोगों ने जमकर मेले का लुफ्त उठाया। शनिवार को भी सरकारी कार्यालयों में बंदी रहने के कारण मेला घूमने वालों की काफी भीड़ उमड़ पड़ी थी। छोटे- छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यवसायियों तक ग्राहकों को संभालने में व्यस्त दिखे। इस क्रम में खेल-तमाशे, झूले वाले व खुले मैदान में जादू दिखाने वाले जमूरों ने भी अच्छी कमाई की। आर्ट एंड क्राफ्ट और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की प्रदर्शनी को छोड़ रेल प्रदर्शनी, कृषि प्रदर्शनी,डीआरडीए, ग्रामश्री मंडप, अपराध निरोध प्रदर्शनी, पशुपालन, स्वास्थ्य विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग समेत कई विभागों की प्रदर्शनी व स्टॉल का अभी तक विधिवत उद्घाटन और चालू नहीं हो सका है। उनका निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल ही रहा है। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए आए लाखों तीर्थ यात्री इन प्रदर्शनियों का अवलोकन और सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त किए बिना ही मेले से लौट गए। मेला घूमने के दौरान मेलार्थियों ने आवश्यकता की वस्तुओं की खरीदारी भी की। बहराइच, पटना, हाजीपुर, सीवान आदि जिले के विभिन्न हिस्सों से आए पापड़ी, खजूर आदि की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ दिखी। पर्यटन विभाग के मुख्य पंडाल स्थित सांस्कृतिक मंच से सूचना एवं जन संपर्क विभाग और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के कलाकारों द्वरा एक से बढ़कर एक गीत- संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियों का भी दर्शकों ने पूरा आनंद उठाया। भीड़ के कारण पुराने और नये गंडक पुल के अलावा मेला क्षेत्र में कई जगहों पर बार- बार जाम की स्थिति उत्पन्न होती रही। भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुराने गंडक पुल पर सभी वाहनों का परिचालन पर रोक लगा दी गई है। सोनपुर और हाजीपुर के बीच सभी तरह के वाहनों का परिचालन नए गंडक पुल से हो रहा है। -- भ्रामक सूचनाओं के युग में मीडिया की जिम्मेदारी पर जोर राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर सोनपुर मेला मीडिया सेंटर में परिचर्चा छपरा, हमारे प्रतिनिधि । राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर रविवार को सोनपुर मेला क्षेत्र स्थित मीडिया सेंटर में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। भ्रामक सूचनाओं के दौर में मीडिया की विश्वसनीयता की रक्षा विषयक परिचर्चा में जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी रविंद्र कुमार ने स्वागत भाषण किया। उन्होंने कहा कि तेज़ी से विकसित होती तकनीक के दौर में खबरों को पहले देने की होड़ में कई बार तथ्य-जांच के बिना सूचनाएं प्रसारित हो जाती हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। यह समाज के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं की बाढ़ जैसी स्थिति है, ऐसे में तथ्यपरक जानकारी की पहचान और पुष्टि मीडिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसलिए आवश्यक है कि संयम और धैर्य के साथ हर सूचना की जांच के बाद ही उसे प्रकाशित किया जाए। परिचर्चा में मौजूद वरिष्ठ पत्रकारों ने भी बदलते मीडिया परिदृश्य, पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जिम्मेदार समाचार प्रेषण पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार-विश्वनाथ सिंह, नंद किशोर शर्मा, अभय कुमार सिंह, शंकर सिंह, सुबोध प्रसाद सिंह, बिपिन कुमार सिंह, संजीत कुमार, गौतम कुमार, अजय सिंह, संजीव सिंह, अवध किशोर शर्मा, मनीष कुमार, विशाल कुमार, दामोदर प्रसाद सहित अन्य मीडिया कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन आपसी संवाद और तथ्यपरक पत्रकारिता को मजबूती देने के संकल्प के साथ हुआ।

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