हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
छपरा व्यवहार न्यायालय ने एक हत्या मामले में सुनवाई के बाद आरोपी मिंटू गिरि को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, चिंटू गिरी को पांच महीने की सजा और अन्य छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। यह मामला 21 जुलाई 2016 का है, जब पीड़ित के पिता की हत्या की गई थी।

साक्ष्य के अभाव में छह आरोपी बरी जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ की अदालत का निर्णय न्यूमेरिक 08 साल बाद मिला न्याय छपरा, नगर प्रतिनिधि। करीब आठ साल पुराने बहुचर्चित हत्या मामले में छपरा व्यवहार न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी को कड़ी सजा दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ विक्रम सिंह परमार की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी मिंटू गिरि को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त तीन माह की सजा भुगतनी होगी।
इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दो वर्ष की सजा भी सुनाई गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसी मामले में एक अन्य आरोपी चिंटू गिरी को धारा 323 के तहत दोषी करार देते हुए पांच माह के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, साक्ष्य के अभाव में टिंकू गिरी, बबलू गिरी, सुशील गिरी, चंदन गिरी, कन्हैया गिरी और पवन गिरी को न्यायालय ने बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा ने अदालत में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कुल सात गवाहों की गवाही प्रस्तुत की, जिसके आधार पर न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने 31 अक्टूबर 2016 को अंतिम प्रपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। यह मामला 21 जुलाई 2016 का है, जब छपरा नगर थाना क्षेत्र के आर्य नगर कटहरी बाग निवासी धीरज गिरि ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके घर के सामने की जमीन पर आरोपी जबरन कब्जा कर बाउंड्री निर्माण कर रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। शोर सुनकर उनके पिता रविंद्र गिरी मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की और उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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