Chapra News: दावों में भरपूर बिजली, हकीकत में कटौती से बेहाल सारण
Chapra News: पेज चार की लीडफोटो नाम से पावर ग्रिड छपरा, नगर प्रतिनिधि। भीषण गर्मी और उमस के बीच सारण की बिजली व्यवस्था की असली तस्वीर अब दावों से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की बेचैनी से सामने आ रही है। बिजली कंपनी...

Chapra News: पेज चार की लीड भीषण गर्मी में बिजली की आंखमिचौली, रातों की नींद उड़ी रिकॉर्ड मांग के बीच लड़खड़ाई बिजली व्यवस्था नूमेटिक 180 मेगावाट आपूर्ति का दावा फोटो नाम से पावर ग्रिड छपरा, नगर प्रतिनिधि। भीषण गर्मी और उमस के बीच सारण की बिजली व्यवस्था की असली तस्वीर अब दावों से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की बेचैनी से सामने आ रही है। बिजली कंपनी जिले को मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली मिलने का दावा कर रही है, लेकिन शहर से लेकर गांव तक लोग घंटों की कटौती, लगातार ट्रिपिंग और तकनीकी फॉल्ट से परेशान हैं। दिन में कारोबार प्रभावित हो रहा है तो रात में बार-बार बिजली गुल होने से लोगों की नींद उड़ गई है। सवाल यह है कि जब जिले को पर्याप्त बिजली मिल रही है, तो आखिर उपभोक्ताओं तक निर्बाध आपूर्ति क्यों नहीं पहुंच पा रही है।
बिजली आपूर्ति की स्थिति
सारण में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने बिजली व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है। जिले को प्रतिदिन करीब 180 मेगावाट बिजली मिलने और मांग के अनुरूप आपूर्ति किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर के प्रमुख इलाकों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ताओं को रोजाना तीन से चार घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा आधे-आधे घंटे पर होने वाली ट्रिपिंग ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। सबसे अधिक मुश्किल रात के समय हो रही है। दिनभर भीषण गर्मी झेलने के बाद लोग रात में राहत की उम्मीद करते हैं, लेकिन बिजली की आंखमिचौली उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रही है। एसी, कूलर और पंखे बंद होते ही घरों में उमस असहनीय हो जाती है। शहर के गुदरी बाजार निवासी अमित कुमार बताते हैं कि रात में हर आधे घंटे पर बिजली आने-जाने से परिवार के किसी सदस्य की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। कई बार तो पूरी रात जागकर बितानी पड़ती है। वहीं भगवान बाजार की गृहिणी सुमिता देवी कहती हैं कि लगातार ट्रिपिंग के कारण इनवर्टर भी ठीक से चार्ज नहीं हो पा रहा है। बिजली जाते ही घर का पूरा कामकाज प्रभावित हो जाता है और छोटे बच्चों व बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
बिजली संकट का असर
बिजली संकट का असर सिर्फ घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। शहर के बाजारों, दुकानों और छोटे कारोबारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगातार बिजली कटने से कंप्यूटर आधारित कार्य, प्रिंटिंग, वेल्डिंग, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी और अन्य छोटे उद्योगों का काम प्रभावित हो रहा है। दुकानदारों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से ग्राहकों को भी परेशानी होती है और कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। भीषण गर्मी के इस दौर में अस्पतालों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। चिकित्सकों का कहना है कि पर्याप्त नींद नहीं मिलने, उमस और लगातार गर्मी के कारण अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार बाधित नींद का असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है, जिससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है।
टेक्निकल खामियां और उपभोक्ता की परेशानियां
पड़ताल में यह भी सामने आया कि बिजली आपूर्ति की सबसे बड़ी बाधा तकनीकी खामियां हैं। जिले में पिछले एक महीने के भीतर दो दर्जन से अधिक ट्रांसफॉर्मर जल चुके हैं। बिजली विभाग का दावा है कि शहरी क्षेत्रों में आठ घंटे और ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे के भीतर ट्रांसफॉर्मर बदल दिए जाते हैं, लेकिन कई गांवों और मोहल्लों के उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें इससे कहीं अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है और लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। जर्जर बिजली तार भी बड़ी समस्या बन चुके हैं। भगवान बाजार निवासी मोनू का कहना है कि कई इलाकों में वर्षों पुराने तार अब भी बदले नहीं गए हैं। बढ़ते लोड के कारण ये तार गर्म होकर गल जाते हैं, जिससे बार-बार फॉल्ट होता है और बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पुराने तारों को बदलकर नई क्षमता वाले केबल नहीं लगाए जाएंगे, तब तक ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या से राहत मिलना मुश्किल है। उपभोक्ताओं की एक और बड़ी शिकायत यह है कि बिजली कटौती का कोई निश्चित समय नहीं है। कभी सुबह, कभी दोपहर तो कभी आधी रात में बिजली चली जाती है। बिजली कंपनी का कहना है कि मेंटेनेंस या अन्य तकनीकी कार्यों के कारण होने वाली निर्धारित कटौती की सूचना पहले ही दे दी जाती है, लेकिन अधिकांश उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी समय पर नहीं मिलती। अचानक बिजली चले जाने से पानी की आपूर्ति, घरेलू कामकाज, पढ़ाई और अन्य आवश्यक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। लोगों का कहना है कि यदि कटौती का समय पहले से तय कर सार्वजनिक कर दिया जाए तो वे अपनी दैनिक जरूरतों की बेहतर योजना बना सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई गांवों में लो-वोल्टेज की समस्या के कारण मोटर, पंपसेट और अन्य विद्युत उपकरण सही ढंग से नहीं चल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई के समय पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है। वहीं कई जगह फॉल्ट होने पर मरम्मत दल के पहुंचने में भी काफी समय लग जाता है। कोट सारण में बिजली की आपूर्ति सामान्य है। मांग के अनुरूप बिजली की उपलब्धता मुख्यालय स्तर से है। उपभोक्ताओं के हितों को लेकर बिजली कंपनी सजग है। तकनीकी कारणों से कभी- कभार बिजली आपूर्ति में परेशानी हो रही है। इसे भी जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। धीरज सती, बिजली एसडीओ शहरी भीषण गर्मी में बिजली बनी सबसे बड़ी मुसीबत, महिलाओं ने उठाए सवाल फोटो नाम से विजया लक्ष्मी रंजन मधु सिन्हा मनीषा कुमारी अनामिका छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण में भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती अब लोगों के सब्र की परीक्षा लेने लगी है। सबसे अधिक मुश्किल महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। आम लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी पीड़ा साझा कर बिजली व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय पर बिजली बिल जमा करने के बावजूद उन्हें नियमित और निर्बाध आपूर्ति नहीं मिल रही है।छपरा शहर की शिक्षिका विजया लक्ष्मी रंजन कहती हैं कि भीषण गर्मी में लगातार बिजली कटौती ने जीवन मुश्किल बना दिया है। समय पर बिल भुगतान करने के बावजूद नियमित बिजली नहीं मिल रही है। शिकायत कहां करें और कब समाधान होगा, यह समझ से परे है।गृहिणी मधु सिन्हा ने कहा कि कई-कई घंटे तक बिजली काट देना उचित नहीं है। यदि कटौती करनी भी पड़े तो उसका समय निर्धारित होना चाहिए, ताकि लोग अपनी जरूरत के अनुसार तैयारी कर सकें।शिक्षिका मनीषा कुमारी का कहना है कि सबसे बड़ी परेशानी रात के समय होती है। बार-बार बिजली जाने से पूरी नींद नहीं हो पाती, जिससे दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है। लगातार अनिद्रा की स्थिति से सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।गृहिणी अनामिका सिंह का कहना है कि बिजली की लचर व्यवस्था का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही कटौती के कारण खाना बनाने, पानी की व्यवस्था और अन्य घरेलू कार्यों में भारी कठिनाई हो रही है।शहरवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।


