
ठंड ने अलाव की लकड़ियों को दी मात, जरूरत के हिसाब से कम पड़ी लकड़ियां
ना सहारा सारण में 20 अंचलों में समुचित व्यवस्था सारण में अलाव को लेकर मुख्यालय से आठ लाख रुपये मिले पेज चार की लीड हिन्दुस्तान पड़ताल छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण जिले में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी...
छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण जिले में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ठंड ने अलाव के लिए मिली लकड़ियों को भी मात दिया है। अलाव की आग बुझ जा रही है पर कंपकंपी जारी रहती है। प्रशासन ने अनुमान के अनुसार लकड़ियां उपलब्ध करा दी पर कड़ाके की लगातार ठंड ने पूर्वानुमानों पर पानी फेर दिया। शीतलहर और गिरते तापमान के बीच गरीबों, असहायों, फुटपाथ पर जीवन यापन करने वालों और रोज़मर्रा की मजदूरी पर निर्भर लोगों के लिए ठंड किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिले भर में अलाव की व्यापक व्यवस्था कर लोगों को राहत पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि ठंड से बचाव के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध संसाधनों का समुचित और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, जिले के सभी 20 अंचलों में अलाव की व्यवस्था के लिए राज्य स्तर से आठ लाख रुपये की राशि सारण जिले को उपलब्ध कराई गई है। जिला मुख्यालय द्वारा यह राशि समय रहते संबंधित अंचलों को हस्तांतरित कर दी गई, ताकि ठंड से बचाव की तैयारियों में किसी तरह की देरी या कमी न हो। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस राशि का उपयोग पूरी सतर्कता और निगरानी के साथ किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि छपरा नगर निगम और नगर पंचायत क्षेत्रों को छोड़कर जिले के ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में करीब 200 सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिदिन अलाव जलाए जा रहे हैं। इन स्थानों में प्रमुख चौक-चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, अस्पताल परिसर के निकट, बाजार क्षेत्र और अन्य भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थल शामिल हैं। रात के समय ठंड से बचने के लिए बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग इन्हीं अलावों के सहारे राहत महसूस कर रहे हैं। पारदर्शिता के लिए सख्त मॉनिटरिंग अलाव की व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए जिला स्तर पर कड़ी मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रत्येक अंचल कार्यालय को निर्देश दिया गया है कि अपने क्षेत्र में जल रहे अलाव का प्रतिदिन फोटो लेकर उसे अक्षांश और देशांतर (जियो टैगिंग) के साथ जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अलाव वास्तव में तय स्थानों पर जल रहे हैं और सरकारी राशि का सही उपयोग हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जियो टैगिंग से निगरानी व्यवस्था और मजबूत हुई है। एक अलाव में कितनी लकड़ी की जरूरत जानकारों के अनुसार किसी सार्वजनिक स्थान पर रात भर लगभग 8 से 10 घंटे अलाव जलाने के लिए लकड़ी की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है। इसमें ठंड की तीव्रता, अलाव का आकार, खुले स्थान में हवा की गति और लकड़ी का प्रकार अहम भूमिका निभाता है। सामान्य तौर पर मध्यम आकार के अलाव के लिए प्रति घंटे 5 से 6 किलोग्राम सूखी लकड़ी की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से यदि एक अलाव 8 घंटे तक लगातार जलाया जाए, तो लगभग 40 से 50 किलोग्राम लकड़ी की खपत होती है। खुले और अधिक ठंडे स्थानों पर यह खपत बढ़कर 60 से 70 किलोग्राम तक भी पहुंच सकती है। सूखी और सख्त लकड़ी, जैसे शीशम या साल, देर तक जलती है और कम मात्रा में अधिक ताप देती है, जबकि नरम या गीली लकड़ी जल्दी जलकर खत्म हो जाती है और ज्यादा मात्रा में खर्च होती है। सार्वजनिक अलाव के लिए औसतन एक क्विंटल लकड़ी प्रति अलाव का प्रावधान व्यावहारिक और संतुलित माना जाता है। हालांकि कई अंचलों में अलाव के लिए 25 किलोग्राम लकड़ी का वजन भी निर्धारित किया गया है, जिसे आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक ही स्थान पर पूरी रात अलाव जलाया जाए, तो कम से कम एक क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। बजट वही, ठंड ज्यादा जानकारी के मुताबिक पिछले वर्ष भी अलाव की व्यवस्था के लिए मुख्यालय स्तर से आठ लाख रुपये का ही आवंटन सारण जिले को मिला था। इस वर्ष भी बजट में कोई वृद्धि नहीं की गई है। हालांकि इस बार ठंड का असर पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक रहा। शीतलहर के कारण करीब एक माह तक स्कूलों को बंद करना पड़ा, वहीं आम लोग घरों में दुबके रहने को मजबूर रहे। ऐसे में बजट न बढ़ने को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। 40 हजार किलो लकड़ी जलने का दावा जिला आपदा प्रबंधन शाखा से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिले के सभी 20 अंचलों में करीब 40 हजार किलोग्राम लकड़ी अलाव जलाने में खर्च की जा चुकी है। यह व्यवस्था खास तौर पर फुटपाथ पर रहने वाले लोगों, मजदूरों, रिक्शा चालकों, राहगीरों और अन्य जरूरतमंदों को ठंड से बचाने के उद्देश्य से की गई है।प्रशासन की ओर से प्रतिदिन अलाव जलाने की सतत निगरानी की जा रही है। प्रत्येक अंचल द्वारा रोजाना जली हुई लकड़ी का विस्तृत हिसाब तैयार कर जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और आवश्यकता के अनुसार आगे की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कंट्रोल रूम को रोज़ाना रिपोर्ट ठंड को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी केवल जिले तक सीमित नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग में प्रतिनियुक्त कर्मी प्रतिदिन पटना स्थित कंट्रोल रूम को जिले की स्थिति से अवगत करा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक जिले में ठंड से किसी भी व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं है, जिसे प्रशासन अपनी सक्रियता का परिणाम मान रहा है।वहीं जिला आपातकालीन संचालन केंद्र भी पूरी तरह सक्रिय है। जिले के सभी अंचलों से ठंड को लेकर अद्यतन जानकारी ली जा रही है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकार के स्तर पर उपलब्ध सभी सुविधाएं जरूरतमंदों तक शीघ्र पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। --- साथ लगाएं ठंड के कहर से बचाव के लिए लोग अलाव के लिए करते रहे इंतजार 17 किलो मीटर लंबे शहर में एक दर्जन जगहों पर जला अलाव 20 दिनों में महज 3 सौ किलो जला अलाव फोटो 14 : तीन दिनों पहले साहेबगंज टमटम पड़ाव में कम मात्रा में जलाया गया अलाव छपरा, एक संवाददाता। ठंड से बचाव के लिए नगर प्रशासन ने इस बार शहर में एक दर्जन जगहों पर महज चार से पांच किलो अलाव जलाकर औपचारिकता का निर्वाह किया है। 20 दिनों में लगभग तीन सौ किलो ग्राम ही लकड़ी जली। 22 दिसंबर से 11 जनवरी तक छपरा शहर में 10°डिग्री से 14°डिग्री तक औसतन तापमान रहा। फिर भी नगर प्रशासन ने अलाव का वजन बढ़ाने में कोई प्रयास नहीं किया। ऐसे छपरा शीत ऋतु का सबसे ठंडा समय होता है। छपरा नगर निगम लगभग 17 किलोमीटर लंबे आकार में फैला है ।जिस प्रकार से ठंड ने इस बार लोगों को घर से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया था। वैसी स्थिति में नगर प्रशासन ने पिछले साल की अपेक्षा इस बार कम जगहों पर ही अलाव जलाया । जहां शहर के लोग अलाव का इंतजार करते रहे लेकिन वहां तक अलाव नहीं पहुंच पाया। मालूम हो 22 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 तक निगम में अलाव जलाने की रिपोर्ट है। हालांकि 1 से 5 जनवरी तक धूप निकलने के कारण शहर में अलाव नहीं जलाया गया। इसके बाद फिर ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा। इसके बाद निगम ने फिर 6 से 11 जनवरी तक अलाव जलाना शुरू किया। पूरी धूप निकलने के बाद 12 जनवरी से अलाव नहीं जलाया गया। अलाव जलने का फोटो खींचकर अफसर को भेजते थे कर्मी नगर निगम क्षेत्र में अलाव जलने के बाद कर्मी अफसर को फोटो खींचकर भेजते थे। इसी से सत्यापन कर लिया जाता था। हालांकि कितनी लकड़ी एक जगह जलानी है, यह निगम की ओर से निर्देश नहीं दिया गया था। कर्मी कहीं कम व कहीं अधिक अलाव जलाते थे। इधर पार्षद सह सशक्त स्थाई समिति के सदस्य संजय प्रसाद ने आरोप लगाया कि निगम ने मौना चौक जैसे व्यावसायिक स्थल पर भी अलाव नहीं जलाया । कई क्षेत्र के पार्षदों के प्रयास के बावजूद भी निगम ने उनके क्षेत्र में अलाव जलाना उचित नहीं समझा। शहर के इन जगहों पर जलाया गया अलाव नगर निगम के सूत्रों की मानें तो शहर के नगर पालिका चौक,मौका चौक, गांधी चौक, भिखारी ठाकुर चौक, कटहरी बाग, साहेबगंज टमटम पड़ाव, थाना चौक,बस स्टैंड, दारोगा राय चौक, भगवान बाजार स्टेशन,हास्पिटल चौक, आश्रय स्थल पर लगातार अलाव जलाया गया। जबकि नगर आयुक्त सुनील कुमार पांडे को सूचना मिलने के बाद गुदरी बाजार, श्यामचक, बहरमपुर व रौजा में भी अलाव जलाया गया।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




