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सोनपुर : अंगूरी में डंसले बिया नगीनिया हे ये ननदी भैया के जगा द

सोनपुर : अंगूरी में डंसले बिया नगीनिया हे ये ननदी भैया के जगा द

संक्षेप:

बिहार की प्रसिद्ध लोकगायिका सरिता साज ने सोनपुर मेला के मुख्य मंच पर भोजपुरी लोकगीतों की तान छेड़ी। उन्होंने भिखारी ठाकुर, कबीर दास और महेंद्र मिश्र जैसे महान कवियों की रचनाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में दर्शकों ने सरिता के गीतों पर खूब तालियां बजाईं और उन्हें जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया।

Sat, 29 Nov 2025 09:06 PMNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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सरिता साज़ की आवाज से गूंजा सोनपुर मेला का मुख्य मंच छपरा, हमारे प्रतिनिधि। बिहार की सुप्रसिद्ध लोकगायिका सरिता साज ने जब हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के मुख्य मंच से भोजपुरी लोकगीतों की तान छेड़ी तो पंडाल में बैठकर कार्यक्रम का आनंद ले रहे दर्शक झूम उठे। कला,संस्कृति युवा विभाग,पर्यटन विभाग और सारण जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकगायिका सरिता साज ने सोनपुर मेला के मुख्य मंच से एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति कर समां बांध दिया। इन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की रचना गंगा स्तुति से की।

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इसके बाद गायिका सरिता साज ने पूर्वी धुन के जनक कहे जाने वाले पंडित महेंद्र मिश्र द्वारा लिखित पूर्वी अंगूरी में डसले बिया नगीनिया हे ये ननदी भैया के जगा द की प्रस्तुति कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम की अगली कड़ी में सरिता साज ने कबीर दास के निर्गुण चदरिया झीनी रे झीनी,अमीर खुसरो के सूफी गीत छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाईके सहित कई गीतों की प्रस्तुति कर दर्शकों को बांधे रखा। की बोर्ड पर कुंदन जी, ओक्टो पैड पर सेराज व तबला पर सोनू से शानदार तरीके से संगत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। गायिका सरिता साज के साथ गायन में सहयोग संगीत शिक्षक अमित कुमार शर्मा ने किया। कार्यक्रम के बाद जिला प्रशासन,सारण की ओर से गायिका सरिता साज को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि गायिका सरिता साज लोक व पारंपरिक गीतों सहित कबीर, भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिश्र और बिहार के अन्य लोकगीतों को गाती है। लोक व पारंपरिक गीतों को इन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कई सरकारी और गैर-सरकारी महोत्सवों सहित आईसीसी आर कोलंबो (श्रीलंका),आर्ट काउंसिल, कराची (पाकिस्तान) व नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट,लाहौर (पाकिस्तान) में अपनी प्रस्तुति दी है। ये अब तक कला संस्कृति एवं युवा विभाग (बिहार सरकार), संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), संगीत नाटक अकादमी (दिल्ली), राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (दिल्ली), मैथिली भोजपुरी अकादमी (दिल्ली), संस्कृति मंत्रालय (मध्य प्रदेश सरकार), उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (प्रयागराज) के कई उत्सव-महोत्सवों में लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी है।