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27 जनवरी, 2020|10:04|IST

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सारण : बिहार में बनेगी फिल्म नीति, कलाकार पाएंगे सरकारी मदद : मंत्री

सारण : बिहार में बनेगी फिल्म नीति, कलाकार पाएंगे सरकारी मदद : मंत्री

कला-संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा है कि राज्य सरकार कला व कलाकारों के विकास के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रही है। सरकार फिल्म नीति बना रही है। सूबे के नालंदा में फिल्मों की शूटिंग के लिए फिल्म सिटी का निर्माण भी हो रहा है। सरकार की यह योजना है कि सूबे में फिल्मकार अपनी फिल्मों की शूटिंग करें। जिस फिल्म में बिहार के 50 प्रतिशत कलाकार होंगे, उस फिल्म को सरकार अनुदानित करेगी। मंत्री ने कहा कि कला संस्कृति विभाग की यह नीति अब उद्योग विभाग में भेज दी गई है। शीघ्र ही उसके अनुपालन की उम्मीद है। मंत्री प्रमोद कुमार शहर के एकता भवन में पहली बार आयोजित सारण इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन करने के बाद कला प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे। सांस्कृतिक गरिमा की भूमि है सारण : मंत्री ने कहा कि सारण सांस्कृतिक भूमि है। यह धरती कला और संस्कृति के मामले में हमेशा अग्रगण्य रही है। यह विद्वता से परिपूर्ण धरती है। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, मौलाना मजहरुल हक, भिखारी ठाकुर, महेंद्र मिश्र सरीखे लोग यहां की धरती की संतान हैं। यह धरती सरयू गंगा का मिलन स्थल है। यह संगम की भूमि है, परित्राण की भूमि है। सोनपुर मेला यहीं पर लगता है। इजरायल की फिल्म छिद्र के बारे में दर्शकों से चर्चा करते निर्देशक नाडो व एरिक। प्रतिभा को पल्लवित करे सरकार : अखिलेंद्रंछपरा। सारण फिल्म फेस्टिवल के ब्रांड एंबेस्डर और वरिष्ठ फिल्म अभिनेता सारण के सपूत अखिलेंद्र मिश्रा ने राज्य सरकार से सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आर्थिक सहयोग की अपील की है। स्थानीय एकता भवन में फेस्टिवल के उद्घाटन के मौके पर अखिलेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार के संस्कृति मंत्रालय को ऐसे आयोजनों के लिए आर्थिक सहयोग करना चाहिए। सरकार कलाकारों और उनकी प्रतिभा को पुष्पित-पल्लवित करने में आगे आए। उन्होंने वर्तमान समाज में संस्कृति और कला के प्रति बढ़ती अरुचि के प्रति चिंता जताई और कहा कि जब तक समाज में संस्कृति, कला, नाटक, सिनेमा, साहित्य का उद्गार नहीं होगा तब तक समाज में अनाचार व दुष्कर्म बंद नहीं होगा। अच्छी संस्कृति से हम स्वस्थ मानसिकता वाले युवकों का निर्माण कर सकते हैं। गणितीय सूत्र के भरोसे नौकरी पाने की ललक में युवा अपनी विरासत को भूलते जा रहे हैं। मैकाले की शिक्षा प्रणाली ने हमारी सभ्यता व संस्कृति को प्रभावित किया है ।आज कैंपस प्लेसमेंट का दौर है। जिस युवक को कैंपस में जाते ही अपनी नौकरी सुनिश्चित होने का एहसास हो, वह अपने मां-पिता की इज्जत कैसे करेगा। आज किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक ज्ञान की जरूरत है।

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  • Web Title:Saran Film policy to be made in Bihar actors will get government help Minister