विश्व लिवर दिवस : सारण में ‘साइलेंट किलर’ बन रहा लिवर रोग, युवाओं पर बढ़ता शिकंजा
छपरा में लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें 25 से 45 वर्ष के युवाओं की संख्या भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में एक लाख से अधिक लोग लिवर समस्याओं से प्रभावित हैं। जागरूकता और समय पर जांच के जरिए इस बीमारी को रोका जा सकता है।

टास्क फोटो- डॉ राजीव कुमार सिंह डीएम गैस्ट्रोलॉजिस्ट पेज चार की लीड चार मरीजों का कोट की जगह रखें छपरा, हमारे संवाददाता। जिले में लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस के मौके पर यह मुद्दा और भी अहम हो जाता है। जिले में अनुमानित एक लाख से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की लिवर समस्या से पीड़ित हैं, जो आने वाले समय में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रहा है। जाने माने उत्तर बिहार के डीएम गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर राजीव कुमार सिंह बताते हैं कि पहले लिवर की बीमारियां 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थीं, लेकिन अब 25 से 45 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
यानी अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कामकाजी और युवा वर्ग भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहा है। खानपान में गड़बड़ी व शराब सेवन प्रमुख कारणों में शामिल लिवर खराब होने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। अत्यधिक शराब का सेवन, फास्ट फूड और जंक फूड का बढ़ता चलन, मोटापा, मधुमेह और वायरल हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन भी लिवर पर बुरा असर डाल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग अक्सर शुरुआती लक्षण जैसे थकान, भूख न लगना और पेट में भारीपन को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। उन्नत इलाज के लिए पटना या अन्य बड़े शहरों पर निर्भरता सारण जिले में लिवर रोग के इलाज की व्यवस्था अभी भी सीमित है। सदर अस्पताल और कुछ निजी क्लीनिकों में प्राथमिक जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उन्नत इलाज के लिए मरीजों को पटना या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे गरीब और ग्रामीण मरीजों को काफी परेशानी होती है और समय पर इलाज नहीं मिल पाने से स्थिति बिगड़ जाती है। एक लाख से अधिक मरीज लिवर रोग की चपेट में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लिवर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जिले में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस बी और सी और सिरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में करीब एक लाख से अधिक मरीज किसी न किसी रूप में इस बीमारी से प्रभावित हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जागरूकता और समय पर जांच से बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में लिवर फेलियर जैसे गंभीर मामलों में भी वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल इलाज का खर्च बढ़ेगा, बल्कि मृत्यु दर में भी इजाफा होने की आशंका है। डॉ राजीव कुमार सिंह का कहना है कि जागरूकता और समय पर जांच से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। बचाव के उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, हरी सब्जियों और फलों का सेवन, नियमित व्यायाम, शराब और तंबाकू से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। साथ ही, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण भी बचाव में कारगर साबित हो सकता है। छपरा सदर अस्पताल के उपाधीक्षक कृष्ण मोहन दुबे का मानना है कि विश्व लिवर दिवस के अवसर पर जिले में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। अगर अभी से सतर्कता नहीं बरती गई, तो आने वाले समय में लिवर की बीमारियां एक बड़ी जनस्वास्थ्य समस्या बन सकती हैं। (छपरा से शशि भूषण पांडेय)
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