
जेपीयू के समंजन कर्मियों को बड़ी राहत: हाईकोर्ट के आदेश से वेतन–पेंशन भुगतान तय
जयप्रकाश विश्वविद्यालय से जुड़े 89 समंजन कर्मियों के वेतन और पेंशन भुगतान के संकट का समाधान होता नजर आ रहा है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद, कर्मचारियों के बीच खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय में उपलब्ध फंड से बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया गया है। सेवानिवृत्त कर्मियों को राहत मिली है, और उम्मीद का माहौल है।
सेवानिवृत्त कर्मियों में भी खुशी की लहर छपरा, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जयप्रकाश विश्वविद्यालय से जुड़े 89 समंजन कर्मियों के वेतन और पेंशन भुगतान को लेकर लंबे समय से चला आ रहा संकट अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिख रहा है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा दिए गए भरोसे और कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद समंजन कर्मियों के बीच खुशी का माहौल है। वर्षों से आर्थिक तंगी और अनिश्चितता झेल रहे कर्मचारियों ने इसे अपने संघर्ष की बड़ी जीत बताया है।हाईकोर्ट के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने विश्वविद्यालय के लेजर की फोटोकॉपी के रूप में एक एक्सट्रैक्ट पेश करते हुए बताया कि जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पास “सैलरी और मिसलेनियस अकाउंट” के तहत 26 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक और “पेंशन अकाउंट” के तहत 96 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि उपलब्ध है।
कोर्ट ने इस एक्सट्रैक्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए माना कि विश्वविद्यालय के पास भुगतान के लिए पर्याप्त आंतरिक संसाधन मौजूद हैं। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि रिट कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उपलब्ध फंड से भुगतान जारी करने का निर्देश विश्वविद्यालय को दिया जा सकता है। डिमांड पर राज्य सरकार देगी राशि सुनवाई के दौरान यह भरोसा भी दिलाया गया कि भविष्य में विश्वविद्यालय द्वारा राज्य सरकार से जो भी राशि की मांग की जाएगी, उसे राज्य सरकार तुरंत रीइम्बर्स कर जारी करेगी। इस आश्वासन के आधार पर विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर ने भी खुली अदालत में कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी समंजन कर्मियों को उनका बकाया वेतन और अन्य देय राशि निश्चित समय-सीमा में दी जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बकाया में वेतन की राशि शामिल है और उपलब्ध फंड से मौजूदा वेतन भुगतान भी शुरू किया जाएगा। सैलरी और मिसलेनियस” व “पेंशन” मद में उपलब्ध फंड से भुगतान कोर्ट ने वाइस-चांसलर को निर्देश दिया है कि “सैलरी और मिसलेनियस” व “पेंशन” मद में उपलब्ध फंड से 31 जनवरी 2026 तक सभी बकाया और एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही 1 फरवरी 2026 से समंजन कर्मियों की नियमित सैलरी का भुगतान शुरू करने का आदेश भी दिया गया है। इस फैसले से उन समंजन कर्मियों को भी बड़ी राहत मिली है, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वर्षों से पेंशन व एरियर के इंतजार में थे।हाईकोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा है कि तय समय-सीमा का पालन अनिवार्य होगा और किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें वाइस-चांसलर की व्यक्तिगत उपस्थिति भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद समंजन कर्मियों और उनके परिवारों में राहत और उम्मीद का माहौल साफ देखा जा रहा है।

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