ताजपुर पुल बंद होने से भड़के ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
ताजपुर पुल को प्रशासन द्वारा अचानक बंद किए जाने से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि एक पखवाड़े में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने पुल के पुनर्निर्माण और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।

ताजपुर पुल बंद होने से भड़के ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी, छोटे वाहनों के परिचालन बहाल करने की मांग मांझी। मांझी-गुठनी राजकीय उच्च पथ पर ताजपुर के समीप दाहा नदी पर बने सड़क पुल को प्रशासन द्वारा अचानक लोहे का गार्डर लगाकर बंद किए जाने से रविवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने पुल के मुहाने पर खड़े होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान लोगों की मांझी सीओ सौरभ अभिषेक तथा बीडीओ उपेन्द्र दास से फोन पर तीखी झड़प भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पुल की घेराबंदी कर प्रशासन ने आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क लगभग काट दिया है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि एक पखवाड़े के भीतर समाधान नहीं निकाला गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रखंड उप प्रमुख मनोज सिंह, पैक्स अध्यक्ष संत सिंह तथा वरीय अधिवक्ता बीरेश चौबे ने कहा कि पुल बंद होने से क्षेत्र के लोगों को “काला पानी की सजा” जैसी स्थिति झेलनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों के लोगों को अब आवागमन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
बीमार लोगों और प्रसव पीड़िता महिलाओं की परेशानी
ग्रामीणों ने कहा कि पुल बंद होने के बाद पुलिस गश्ती भी प्रभावित हो गई है, जिससे चोरी और तस्करी की घटनाओं में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों और प्रसव पीड़िता महिलाओं को हो रही है। अब उन्हें इलाज के लिए मांझी के बजाय सिवान जिले के सिसवन अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि प्रशासन ने करीब छह वर्ष पहले ही इस पुल को परित्यक्त घोषित कर दिया था। इसके बावजूद अब तक न तो पुल के पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल हुई और न ही मरम्मत कराई गई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पुल की स्थिति पहले से खराब थी तो समय रहते वैकल्पिक मार्ग या डायवर्जन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
पुल के पुनर्निर्माण की मांग
आक्रोशित ग्रामीणों ने फिलहाल ताजपुर पुल से कार, जीप समेत छोटे वाहनों का परिचालन बहाल करने, तत्काल डायवर्जन बनाने तथा पुल निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। साथ ही दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई करते हुए पुल के शीघ्र नवीनीकरण की मांग भी उठाई।
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लेखक के बारे में
Jitendra Kumar Pandeyशॉर्ट बायो: जितेंद्र कुमार पांडेय पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ के छपरा जिला ब्यूरो टीम से जुड़कर शिक्षा, कृषि बीट में रिपोर्टिंग करते हैं। नियमित तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रिपोर्टिंग करते हैं।
परिचय एवं अनुभव
जितेंद्र ने सारण जिले के दाउदपुर से 2008 में रिपोर्टिंग की शुरुआत की। 2015 में छपरा जिला मुख्यालय में हिन्दुस्तान की ब्यूरो टीम का हिस्सा बने। प्रिंट के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
कॅरियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
अपने कॅरियर की शुरुआत 2008 में हिन्दुस्तान अखबार से की। यहां प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2015 में जिला मुख्यालय में प्रिंट और डिजिटल में कदम रखा।
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बीएमसी मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट हैं। राष्ट्रीय स्तर की चार पांच खबरें एक्सक्लूसिव के तौर पर ब्रेक किया। इसके बाद राष्ट्रीय चैनलों ने भी उस खबर को उठाया।
विशेषज्ञता
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