बारिश ने खोली नगर निगम व्यवस्था की पोल, दहियांवा डीह और नगीना सिंह की गली बनी ‘टापू’
पेज चार की लीड या सेकेंड लीड मानसून बारिश ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। बुधवार को रात में हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।...

पेज चार की लीड या सेकेंड लीड फोटो- 3 : वार्ड 28 स्थित दहियांवा डीह में बुधवार को बारिश के बाद जलमग्न सड़क छपरा, एक संवाददाता। प्री-मानसून बारिश ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। बुधवार को रात में हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है । जलजमाव के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। खासकर वार्ड संख्या 28 स्थित दहियांवा डीह और नगीना सिंह की गली पूरी तरह पानी में डूब गई है। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोग इस इलाके को “टापू” की संज्ञा दे रहे हैं। बताया जाता है कि नगर निगम सफाई एवं नाला उड़ाही के नाम पर प्रत्येक माह करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो जा रहा है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि नालों की नियमित सफाई नहीं होने और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं रहने के कारण हर वर्ष यही समस्या उत्पन्न होती है। वार्ड 28 के पूर्व पार्षद मुन्ना अंसारी ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर दहियांवा डीह एवं नगीना सिंह की गली में जलजमाव से तत्काल राहत दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि नगर प्रशासन शीघ्र पहल नहीं करता है तो वे स्थानीय लोगों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। प्रेषित पत्र में बताया है कि बुडको द्वारा गंदे नाले की पानी के प्रवाह को बंद कर दिया है।इस वजह से यहां के सैकड़ों घरों के किचेन की पानी का प्रवाह नहीं हो पा रहा है। बच्चे वयस्क, बूढ़े, महिला -पुरुषों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने बताया कि बारिश होते ही सड़क और घर का अंतर खत्म हो जाता है। बच्चों को स्कूल भेजना और बुजुर्गों का निकलना मुश्किल हो जाता है। वहीं गृहिणी सीमा देवी ने कहा कि नाले की सफाई सिर्फ कागजों पर होती है। हर साल यही परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन समाधान नहीं होता। इधर गांधी चौक से नेहरू चौक तक मुख्य सड़क भी बारिश के पानी से बदहाल बनी रही। सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर बाइक चालक फिसलते नजर आए। शहरवासियों का कहना है कि मानसून आने से पहले यदि नगर निगम ने जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से अविलंब स्थायी समाधान की मांग की है।
सदर अस्पताल में जलजमाव से मरीज से लेकर डॉक्टर तक परेशान
फोटो 2 सदर अस्पताल परिसर के बाहर जल जमाव और कीचड़ लांघकर जाते मरीजे छपरा ,हमारे संवाददाता । सदर अस्पताल परिसर में बारिश के बाद उत्पन्न जलजमाव और कीचड़ की समस्या ने मरीजों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की परेशानी बढ़ा दी है। अस्पताल के इमरजेंसी परिसर, ओपीडी, सिविल सर्जन कार्यालय, विभिन्न विभागीय कार्यालयों से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचने के लिए लोगों को कीचड़ और जमा पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हालत यह है कि अस्पताल आने वाले मरीजों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मियों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश में अस्पताल परिसर की सूरत को बिगाड़ दिया । प्रतिदिन करीब 1000 के आसपास मरीज इलाज करने के लिए यहां पहुंचते हैं l बारिश के कारण अस्पताल परिसर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है। जगह-जगह कीचड़ फैल जाने से लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले दोपहिया वाहन चालक भी फिसलन के कारण हादसे का शिकार हो रहे हैं। कोपा निवासी शैलेश कुमार ने बताया कि वह इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल परिसर में कीचड़ के कारण उनकी बाइक फिसल गई। इस घटना में उनके कपड़े पूरी तरह खराब हो गए। उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र था कि उन्हें गंभीर चोट नहीं लगी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। उनका कहना था कि अस्पताल प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए। वहीं खेड़ा निवासी कविता देवी ने बताया कि अस्पताल परिसर में जलजमाव और कीचड़ के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मांग की कि परिसर में जल्द से जल्द फेवर ब्लॉक और सड़क का पक्कीकरण कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
तेज आंधी पानी से मक्के की फसल बर्बाद,किसान मायूस
फोटो- 11 दरियापुर में बुधवार की रात आई तेज आंधी पानी में गिरी मक्के की फसल दरियापुर। प्रखंड में बुधवार की रात आई तेज आंधी-पानी ने सबसे ज्यादा मक्के की फसल को बर्बाद किया है। खेतों में मक्के की फसल गिर गई है। वहीं खेतों में पानी भी लग गया है जिससे मक्के के सड़ने की संभावना प्रबल हो गई है। कुछ मक्के की फ़सल तैयार भी हो चुकी थी। कुछ अभी तैयार होने वाली थी। दोनों को भारी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के अनुसार करीब एक सप्ताह से रुक रुक हो रही तेज आंधी पानी से पहले ही मक्के की कई खेतों की फसलें गिर चुकी थी। बुधवार की रात की आंधी पानी ने सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाया है। अधिकांश खेतों में लगी मक्के की फसल जमीन पर गिर गई हैं और पीली पड़ गई है।कई खेतों में पानी भी लग गया है। किसान इसको लेकर काफी चिंतित व मायूस हैं।बता दें कि किसान इस बार मक्के की खेती ज्यादा मात्रा में किए थे। पिछली बार ज्यादा मुनाफा हुआ था।जिससे मक्के की खेती की तरफ किसानों का आकर्षण बढ़ा था। लेकिन लगता है उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।अभी भी मौसम सही नहीं है।
आंधी-बारिश में सड़क पर गिरा पेड़, आवागमन में हुई परेशानी
रामपुर बथानी टोले में सड़क पर गिरा था विशाल पेड़ 15 - गड़खा प्रखंड के रामपुर बथानी टोले में बुधवार की रात आई तेज आंधी और बारिश के कारण एक विशाल पेड़ अचानक सड़क पर गिर पड़ा। इसके चलते उक्त सड़क पर आवागमन में लोगों परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि स्थानीय मुखिया की पहल पर गुरुवार की दोपहर गिरे पेड़ को सड़क पर से हटा लिया गया था। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। लोगों के मुताबिक तेज हवा के कारण विशाल पेड़ सीधे सड़क पर गिर गया जिससे आवागमन बाधित हो गया। यह ग्रामीण सड़क मुख्य मार्ग को जोड़ने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस मार्ग पर अवरोध उत्पन्न होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। लोगों को सड़क किनारे से होकर जोखिम उठाते हुए गुजरना पड़ रहा था।
तरैया में बारिश की पानी जलजमाव से आवागमन में परेशानी
7 - तरैया गवंद्री गांव में एसएच पर बारिश की पानी में जलजमाव तरैया, एक संवाददाता। तरैया में बुधवार की आई तेज बारिश से तरैया बाजार सहित कई गांवों में एसएच पर जलजमाव की समस्या अब लोगों के लिए गंभीर संकट बन गई है। बाजार से गुजरने वाली एसएच 73 तरैया-मढ़ौरा और एसएच-104 तरैया-अमनौर सड़क के किनारे बने नाले पूरी तरह जाम हो चुके हैं। दुकानदारों का व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पैदल चलने वाले लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। गवंद्री गांव में जलजमाव से सड़क नदी में तब्दील हो गया है। उधर प्रखंड के चिमनी भट्ठा पर बने कच्चे ईट पानी में डूबकर नष्ट हो गये।
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