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धूप होते ही पेड़ों के नीचे जुट जाते हैं बस्ती के लोग

छपरा-सीवान रोड पर रसूलपुर चट्टी से एक सौ मीटर भीतर नवादा पंचायत की महादलित बस्ती के लोग धूप चढ़ते ही पेड़ों के नीचे इकट्ठा हो जाते हैं। इसलिए नहीं कि वहां कोई सभा या बैठक होती है बल्कि इसलिए कि वे बिजली सुविधा से महरूम हैं। चालीस साल पहले यहां बिजली के खंभे गाड़ दिये गये पर उस पर तार नहीं चढ़े। मोहल्लेवासी अब भी बिजली की आस में हैं। गर्मी भीषण हैं तो पेड़ों के नीचे बैठ दोपहर तक दिन गुजारते हैं। हाथ से बने पंखे से ठंडी पाना चाहते हैं। मोहल्ले की 95 वर्षीया गिरिजा देवी व 70 वर्षीया राधिका देवी ने निराश होकर कहा कि अब लगता है कि हमलोगों के जीते-जी बिजली देखने को नहीं मिलेगी। मोहल्ले की सबसे बुजुर्ग महिला गिरिजा देवी हाथ पंखा झलते कहती हैं कि ‘बबुआ मुए के किनारे अइनी, तनी हमहू बिजली देख लेतीं, आखिर त जिनगी बेना (हाथ पंखा) हांकते बीत गइल। मोहल्लेवासी ललन राम, टीमल राम, रामजुगल राम व अन्य कहते हैं कि गर्मी जब रंग दिखाती है तो सारे मोहल्ले के बच्चे, बूढे जवान, महिला-पुरुष सभी बाहर निकल पेडों के नीचे पहुंच जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मुखिया से लेकर एमपी व एमएलए तक वोट के दिनों में बिजली लाने की बात कहते हैं पर हमें बार-बार छलावा ही मिलता है। पहली बार आरक्षित सीट से गांव में मुखिया पद आया तो लोगों को लगा कि वंचित गरीब लोगों के लिए बिजली दिलाने के लिए नये मुखिया कदम उठायेंगे पर अब तक कोई खोज खबर नहीं ली गई। मोहल्ले में महादलित और अन्य पिछड़ी जातियों को मिला कर करीब दो दर्जन से ऊपर परिवार हैं जो बिजली से वंचित है। इनके आस-पडोस के कुछ सक्षम परिवारों ने 100 मीटर दूर रसूलपुर चट्टी से बिजली का कनेक्शन खींच लिया है। पर बाकी लोगों का कहना है कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि इतनी दूर से कनेक्शन खींच सके।

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  • Web Title:People of the settlement gather under the trees as soon as they are sunny