झाड़ियों में मिली जिंदगी: रातभर रोता रहा नवजात, सुबह ग्रामीणों ने बचाई जान

Jitendra Kumar Pandey हिन्दुस्तान, छपरा
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कोपा (सारण) में एक नवजात बच्चे को झाड़ियों में रातभर रोते हुए पाया गया। ग्रामीणों ने सुबह उसकी आवाज सुनकर उसे बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को गोद में लेकर पुलिस ने उसकी माँ की पहचान के लिए जांच शुरू की। घटना ने लोगों में गुस्सा और दया दोनों पैदा कर दी।

झाड़ियों में मिली जिंदगी: रातभर रोता रहा नवजात, सुबह ग्रामीणों ने बचाई जान

झाड़ियों में मिली जिंदगी: रातभर रोता रहा नवजात, सुबह ग्रामीणों ने बचाई जान कोपा में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना, मां की बेरुखी पर फूटा लोगों का गुस्सा कोपा (सारण)। छपरा–सिवान मुख्य मार्ग एनएच-531 पर गुरुवार की रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। कोपा थाना क्षेत्र के बसडीला शिव मंदिर के समीप झाड़ियों में एक नवजात मासूम पूरी रात जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा। भूख, ठंड और दर्द से कराहते उस बच्चे की आवाज सुनकर शुक्रवार की सुबह ग्रामीणों ने उसे मौत के मुंह से बाहर निकाला।

ग्रामीणों की जागरूकता

ग्रामीणों के अनुसार सुबह मंदिर के पास स्थित एक दुकान पर बैठे लोगों को किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले लोगों को लगा कि शायद आसपास किसी घर से आवाज आ रही है, लेकिन जब रोने की आवाज लगातार आती रही तो ग्रामीण झाड़ियों की ओर बढ़े। वहां कपड़े में लिपटा एक नवजात बच्चा पड़ा मिला। मासूम की हालत देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। घटना की सूचना तुरंत डायल-112 को दी गई। सूचना मिलते ही अजित कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने खुद बच्चे को गोद में उठाया और तत्काल इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल भेजा। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद नवजात को खतरे से बाहर बताया। बाद में बच्चे को चाइल्ड केयर विभाग को सौंप दिया गया।

गुस्सा और दया

“अगर सुबह आवाज नहीं सुनाई देती...” ग्रामीणों का कहना था कि अगर सुबह बच्चे के रोने की आवाज किसी ने नहीं सुनी होती तो शायद मासूम की जान नहीं बच पाती। घटना के बाद आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था— आखिर कोई मां अपने ही कलेजे के टुकड़े को इस तरह मरने के लिए कैसे छोड़ सकती है? कई महिलाओं ने बच्चे को देखकर उसे गोद में लिया और दुलार किया। वहीं कुछ दंपतियों ने नवजात को गोद लेने की इच्छा भी जताई। ग्रामीणों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश दिखा। लोगों ने कहा कि मां की ममता को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन इस घटना ने इंसानियत और रिश्तों दोनों को शर्मसार कर दिया।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस आसपास के इलाकों में जांच कर रही है। मंदिर और सड़क किनारे लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि बच्चे को झाड़ियों में छोड़ने वाली महिला की पहचान हो सके। घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है और लोग मासूम के सुरक्षित भविष्य की दुआ कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवजात बच्चे को किसने बचाया?
ग्रामीणों ने नवजात बच्चे को बचाया।
Jitendra Kumar Pandey

लेखक के बारे में

Jitendra Kumar Pandey

शॉर्ट बायो: जितेंद्र कुमार पांडेय पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ के छपरा जिला ब्यूरो टीम से जुड़कर शिक्षा, कृषि बीट में रिपोर्टिंग करते हैं। नियमित तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रिपोर्टिंग करते हैं।


परिचय एवं अनुभव
जितेंद्र ने सारण जिले के दाउदपुर से 2008 में रिपोर्टिंग की शुरुआत की। 2015 में छपरा जिला मुख्यालय में हिन्दुस्तान की ब्यूरो टीम का हिस्सा बने। प्रिंट के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।


कॅरियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
अपने कॅरियर की शुरुआत 2008 में हिन्दुस्तान अखबार से की। यहां प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2015 में जिला मुख्यालय में प्रिंट और डिजिटल में कदम रखा।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएमसी मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट हैं। राष्ट्रीय स्तर की चार पांच खबरें एक्सक्लूसिव के तौर पर ब्रेक किया। इसके बाद राष्ट्रीय चैनलों ने भी उस खबर को उठाया।


विशेषज्ञता
खबरों में तथ्य उद्भेदन
एक्सक्लूसिव, शिक्षा

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